जनता के पैसे से मलाई चाट रहे अफसर और नेता

लापरवाह नगर पालिका प्रशासन ने सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए

रतनपुर. नगर पालिका परिषद आफिस रतनपुर में खड़ी हाइड्रोलिक मोबाइल मोटर लिफ्टर कबाड़ होने का इंतजार कर रही वहीं ठेका कर्मी जान जोखिम में डाल सीढ़ियां चढ़ कर करंट प्रवाहित बिजली के खंभों पर खराब लाइटें और रखरखाव का काम करने पर मजबूर है. लापरवाही इतना की ठेका कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए गए हैं.
बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक शहर रतनपुर के नगर पालिका परिषद् आफिस के कारनामे भी अजबगजब हैं. साल भर पहले नगर पालिका परिषद ने शहर की गलियों में प्रकाश की व्यवस्था को बेहतर बनाने लाखों रुपए खर्च कर हाइड्रोलिक मोबाइल मोटर लिफ्टर की खरीदी की है. इसे शहर में लाकर नगर पालिका परिषद आफिस में रखे साल भर का समय पूरा होने को है. इसका उपयोग शुरू नहीं किया गया है.

नगर पालिका परिषद् के ठेका कर्मी आज भी जान जोखिम में डाल कर ऊंचे ऊंचे बिजली के करंट प्रवाहित खंभों पर सीढ़ियों से चढ़ कर काम करने पर मजबूर है. करंट प्रवाहित बिजली के ऊंचे ऊंचे खंभों पर चढ़कर काम करने वाले ठेका कर्मियों को नगर पालिका प्रशासन के द्वारा सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए गए हैं. देखा जा सकता हैं कि काम कर रहे कर्मचारियों के हाथ में न तो ग्लोब है और न सिर पर हेलमेट. कर्मचारियों ने सुरक्षा हैंगर बेल्ट भी नहीं पहना है. वो ऐसा इसलिए है कि काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा के संसाधन उपलब्ध कराये ही नहीं गए हैं. जैसा कि सुविधा जनक हाइड्रोलिक मोबाइल मोटर लिफ्टर नगर पालिका परिषद आफिस में कबाड़ होती खड़ी है और इसका उपयोग नहीं कराया जा रहा है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब उपयोग ही नहीं करना है तो लाखों रुपए खर्च कर इसकी खरीद नगर पालिका परिषद द्वारा क्यों की गई है. ऐसे में कमीशन के खेल को जनता समझ ही रही है. जनता के पैसे पर किस तरह अफसर और नेता मलाई चाट रहे.

जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस ओर न तो मुख्य नगर पालिका अधिकारी ध्यान दे रहे और न नगर पालिका परिषद् की सत्ता पर काबिज भाजपा समर्थित अध्यक्ष और पार्षद. वहीं शहर में विपक्ष की भूमिका निभा रहे प्रदेश की सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी के पार्षदों, एल्डरमैन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी समझ से परे है. शहर में संचालित अन्य सेवाओं का कमोबेश यही हाल है. इन मामलों पर अपना पक्ष रखने जिम्मेदार अधिकारी भी नगर पालिका परिषद् कार्यालय से नदारद रहते हैं. इन सब का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ता है.