परिचालन से बाहर होने लगीं पोहा मिलें

भाटापारा। बारिश। रास्ते बंद। परिणाम कमजोर आवक के रूप में सामने है। मांग की तुलना में महज 25 फ़ीसदी आपूर्ति के बाद महामाया धान में तूफानी तेजी आ रही है, तो पोहा पहली बार 4000 रुपए क्विंटल पर पहुंच गया है। कमजोर उपलब्धता, कई तरह की परेशानियों की वजह बन रही है। सबसे बड़ी यह कि लगभग 20 फ़ीसदी यूनिटें परिचालन से बाहर हो चुकीं हैं।

बारिश के मौसम में रबी फसल पर निर्भर रहने वाली पोहा मिलों को पहली बार महामाया धान की शार्ट सप्लाई का सामना करना पड़ रहा है। बारिश, बाढ़ और रास्ते बंद होने जैसी प्रतिकूल स्थितियों के बाद महामाया की कीमत शायद पहली बार एचएमटी जैसे धान की बारीक किस् आगे निकल रही है। प्रतिस्पर्धी खरीदी के बीच तेजी आने वाले दिनों में भी बने रहने के आसार हैं। लिहाजा मिलों में काम के घंटे कम किए जा रहें हैं या परिचालन के दिन कम हो रहे हैं।

बारिश में यह जिले

बेमेतरा, बिलासपुर और मुंगेली। यह तीन ऐसे जिले हैं, जो बारिश के दिनों में पोहा मिलों की कुल मांग का 75 फ़ीसदी हिस्सा पूरा करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यही 3 जिले, रबी सत्र में महामाया धान की फसल बड़े रकबे में लेते हैं। लगन और मेहनत से ली गई यह फसल बेहतर उत्पादन और भरपूर कीमत भी दिलाती है।

इसलिए आवक पर ब्रेक

पिछले 1 सप्ताह से हो रही बारिश से नदी-नालों में जलस्तर बढ़ा हुआ है। पुल और पुलियों के बंद होने की वजह से आवक में 75 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है। शेष बची 25 फ़ीसदी आवक पर भी ब्रेक लगने की आशंका बन रही है क्योंकि कीमत, खरीदी की शक्ति से बाहर जाती नजर आ रही है।

परिचालन और उत्पादन में कमी

सीजन की मांग पोहा में बनी हुई है लेकिन धान की खरीदी ऊंची कीमत में करनी पड़ रही है। इसलिए पोहा मिलों ने काम की अवधि में कमी लानी चालू कर दी है, तो कुछ यूनिटें परिचालन से किनारा करने के फैसले के लिए मजबूर हो चुकीं हैं। असर पोहा की कीमत पर पहुंच पड़ना चालू हो चुका है।

आवक और दर

कृषि उपज मंडी में पोहा क्वालिटी के धान की आवक इस समय लगभग 5000 कट्टा प्रतिदिन की बताई जा रही है जबकि पोहा यूनिटों को प्रतिदिन लगभग 20000 कट्टा महामाया धान की जरूरत होती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धी खरीदी के बीच प्रति क्विंटल 2200 से 2350 रुपये पर सौदे लिए जा रहे हैं। तेज कीमत पर धान की खरीदी के असर से पोहा 3700 से 4000 रुपए क्विंटल की नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है।

कमजोर आवक के बीच ऊंची कीमत पर खरीदी की वजह से पूंजीगत समस्याएं आ रहीं हैं। इसलिए परिचालन के समय कम किए जा रहे हैं।

रंजीत दावानी, अध्यक्ष, पोहा मिल एसोसिएशन, भाटापारा