डीजल और लोहा की कीमत बढ़ने के बाद बोर खनन हुआ महंगा

भाटापारा। किसानों के लिए जरूरी सूचना। डीजल की बढ़ती कीमत के बाद बोर खनन पर इस बार प्रति फीट 15 रुपए ज्यादा देने होंगे। दर महंगी लग सकती है लेकिन सिंचाई जरूरी है इसलिए अतिरिक्त रकम की व्यवस्था करनी ही होगी। यह भी जान लें कि केसिंग के लिए लगने वाली रकम भी कुछ ज्यादा हो सकती है। यह इसलिए क्योंकि लोहे की कीमत भी लगभग हर दिन बढ़त ले रही है।

मौसम के बदलते तेवर के बीच बोर खनन और महत्वपूर्ण हो चला है। खरीफ की तैयारियां कर रहे किसानों की पूछ-परख बोर खनन एजेंसियों तक पहुंचने लगी है। यह सिलसिला तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश तक पहुंच चुका है क्योंकि इन प्रदेशों से ही रिग मशीनें छत्तीसगढ़ में पहुंचती हैं। बढ़ती महंगाई और डीजल की रोज आने वाली नई कीमत का असर इस क्षेत्र में असर दिखने लगा है। इसलिए बीते साल की तुलना में इस बार प्रति फीट 15 रुपए चार्ज बढ़ने की खबर आ रही है।

इस दर पर खनन

देश स्तर पर डीजल की कीमत बढ़ने के बाद लगभग हर क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। इसी कड़ी में नया नाम, बोर खनन क्षेत्र का भी जुड़ रहा है क्योंकि सीजन ने दस्तक दे दी है। फास्ट रिग मशीन एजेंसियों ने इस खरीफ के लिए जो भाव खोले हैं उसके मुताबिक अब 85 रुपए प्रति फीट के हिसाब से भुगतान करना होगा। मालूम हो कि यह दर बीते साल से 15 रुपए ज्यादा महंगी है लेकिन विकल्प के रास्ते नहीं हैं, इसलिए विवशता में स्वीकार्यता मिल रही है।

गहराई न्यूनतम और अधिकतम

अपने ब्लॉक में भूगर्भ जल स्रोत का स्तर सामान्य बताया जा रहा है लेकिन जिस संख्या में जल दोहन होने की खबर है, उसके बाद किसानों के बीच न्यूनतम गहराई 300 फीट और अधिकतम गहराई 400 फीट तक खनन को प्राथमिकता दी जा रही हैं। गहराई को लेकर यह स्तर बीते 2 साल से स्थिर बना हुआ है। लिहाजा यह इस साल भी बने रहने की संभावना है।

संकटग्रस्त क्षेत्र

बोर खनन करने वाली एजेंसियां मानती हैं कि विकासखंड का मर्राकोना, सिलवा, निपनिया और पासीद के आसपास की जमीन कड़ी चुनौती देगी, क्योंकि यह ऐसे क्षेत्र हैं,जहां पथरीली चट्टान और रेत गहराई तक मिलती है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों को इस बार भी विशेष ध्यान में रखा जा रहा है। उपाय भी किए जा रहे हैं।

यह भी महंगे

डीजल की ही भांति केसिंग पाइप की कीमत परेशान कर सकती है क्योंकि लोहे की कीमत भी लगातार बढ़ रही है। विकल्प के रूप में पीवीसी पाइप तो है लेकिन इसे बनाने के लिए जरूरी सामग्री की दरें महंगी हो रहीं हैं लिहाजा इसकी भी खरीदी ऊंची कीमत पर करनी पड़ रही है। इसलिए बोर खनन का खर्च इस बार ज्यादा देना पड़ेगा।

प्रति फीट दर बढ़ी

डीजल और लोहे की कीमत बढ़ने के असर से इस बार बोर खनन में प्रति फीट दर बढ़ाई जा रही है। फास्ट रिग मशीनों के लिए तमिलनाडु को सूचना भेजी जा चुकी है।

  • प्रदीप अग्रवाल, ऋषभ बोरवेल्स, भाटापारा