होता है तैयार 5 साल में, नहीं लगते दीमक
बिलासपुर। देश के पांच राज्य में मिलता है। छह प्रदेश में इसकी व्यावसायिक खेती हो रही है। मालाबार नीम है इसका नाम, जो अब छत्तीसगढ़ में अपनी पहुंच बनाने की तैयारी कर रहा है। मौसम का पूरा साथ मिल रहा है, क्योंकि इसकी बोनी का समय करीब आ चुका है।
मालाबार नीम या महानीम। या कहें घोड़ा नीम। मिलिया प्रजाति का नीम का यह पेड़, जिस तरह प्लाईवुड इंडस्ट्रीज में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है उसके बाद, अपने छत्तीसगढ़ में भी इसे जगह मिल रही है, क्योंकि प्रदेश में बड़ी संख्या में प्लाईवुड इंडस्ट्रीज चल रहीं हैं। जरूरतें और मांग पूरी करना है, इसलिए वानिकी वैज्ञानिकों ने ट्री-फार्मिंग में अब इसका भी नाम सुझाया है और कहा है कि इसकी व्यावसायिक खेती अपने प्रदेश में भी संभव है।
क्या है मालाबार नीम
मिलिया प्रजाति का यह मालाबार नीम, अपने प्रदेश में महानीम के नाम से जाना जाता है। रोपण के 5 से 10 वर्ष की उम्र के बाद इसे जरूरत के हिसाब से काटा जा सकता है। 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच खुद को तैयार कर लेने वाला यह वृक्ष 45 डिग्री के उच्च तापमान को भी सहन करने में सक्षम है। 1000 मिली मीटर वर्षा वाले क्षेत्र में शीघ्रता के साथ तैयार होने वाला यह वृक्ष 650 मिली मीटर वर्षा में भी तैयार हो जाता है। नहीं होने की स्थिति में केवल नमी वाली भूमि पर भी यह तैयार हो जाता है। लाल दोमट, काली दोमट और जलोढ़ मिट्टी में भी इसका रोपण संभव है।
हर विधि उपयुक्त
मालाबार नीम को बीज के द्वारा तैयार किया जा सकता है, तो वानस्पतिक प्रबंधन याने कलम तकनीक से नए पौधे बनाए जा सकते हैं। रोपण विधि से भी इसे लगाया जा सकता है। पानी प्रबंधन की व्यवस्था जरूर देखनी होगी लेकिन बेहतर परिणाम देने वाला मालाबार नीम को प्रकाश बेहद पसंद है। लिहाजा तीनों तकनीक में इसका ध्यान रखना होगा।
अंतर की जगह पर यह फसल
अप्रैल और मई माह में लगाए जाने वाले मालाबार नीम के पौधों के बीच की खाली जगह पर मूंगफली, हल्दी, मिर्च, गेहूं, उड़द, जौ, गन्ना, केला और पपीता की फसल ली जा सकती है। दिलचस्प यह कि इसके पौधे या बीज का रोपण खेत के अलावा मेड़ पर भी किया जा सकता है। इस प्रकार यह हर तरह की जमीन पर तैयार हो सकता है।
मांग क्षेत्र
मालाबार नीम की लकड़ी की मांग सबसे ज्यादा प्लाईवुड इंडस्ट्रीज में है। इसके अलावा इसकी लकड़ी से माचिस की तिलियां, पेंसिल, वाद्ययंत्र, पैकिंग बॉक्स बनाने वाले उद्योग भी अच्छी मांग वाले क्षेत्र है। तकनीक के दौर में लकड़ी के कृषि उपकरण भी अब बनाए जाने लगे हैं। इसलिए ऐसे उद्योग भी बड़ी मात्रा में मालाबार नीम की लकड़ी की मांग कर रहे हैं। जाहिर है कि मांग क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है।
यह प्रदेश अव्वल
सिक्किम, मेघालय, असम, उत्तरी पंजाब और दक्षिण भारत में प्राकृतिक तौर पर तैयार इसके जंगल से बीज और नए पौधे अब आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में पहुंच रहे हैं। अब बारी है, अपने छत्तीसगढ़ की। जहां बहुपयोगी मालाबार नीम की व्यावसायिक खेती बढ़़ रही है।
5 साल में तैयार
मालाबार नीम की खासियत यह है कि इसे ज्यादा खाद और पानी की जरूरत नहीं होती। यह सभी प्रकार की मिट्टी में आसानी से लगाया जा सकता है। 5 साल में तैयार करने वाला यह पेड़ अपनी दीमकरोधी विशेषता की वजह से प्लाईवुड इंडस्ट्रीज में अच्छी मांग में हैं।
- डॉ अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट, फॉरेस्ट्री, टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर




