कोयला खनन रोकने आदिवासी सड़क पर
रतनपुर। केंद्र की मोदी सरकार देश के खनिज संसाधनों को अडानी को सौंप रही, वहीं प्रदेश की भूपेश सरकार आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर जल जंगल जमीन उनको उपलब्ध करा रही है। यह बात हसदेव बचाओ पदयात्रा में तीन सौ आदिवासियों के साथ पहुंचे छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने व्यक्त किए।
हसदेव अरण्य क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर से 4 अक्टूबर को शुरू हुई हसदेव बचाओ पदयात्रा शुक्रवार की शाम रतनपुर पहुंची। जहां रात्रि विश्राम के बाद शनिवार की सुबह पदयात्री बिलासपुर के लिए रवाना हुए।
पत्रकारों से चर्चा करते छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने कहा हसदेव अरण्य क्षेत्र समृद्ध वन इलाका है। बांगों बांध का केसमेंट भी है। बांगों बांध के पानी से जांजगीर चांपा जिले की खेतिहर जमीन सिंचित होता है। आदिवासियों की बाहुल्यता होने की वजह से संविधान की पांचवीं अनुसूची और “पेसा” भी लागू है पर्यावरण और जंगल को होने वाले नुकसान और आजीविका के प्रभावित होने की वजह से इस क्षेत्र के निवासी कोयला खदान खोलने का विरोध कर रहे हैं। अपने ग्राम पंचायतों की ग्राम सभाओं में इसके खिलाफ प्रस्ताव भी पारित कर चुके हैं। इन सब के बाद भी सरकार जबरदस्ती वनांचल के ग्रामीणों की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर रही है। फर्जी ग्राम सभाओं के आधार पर कोयला खनन की अनुमति दी जा रही है। पांच कोयला खदानों के लिए हसदेव अरण्य क्षेत्र के हजार एकड़ जंगल की जमीन को तबाह करने की योजना बनाई जा रही है।
श्री शुक्ला ने बताया इस क्षेत्र के आदिवासी इसके खिलाफ बीते एक दशक से आंदोलनरत हैं, वहीं सरकार और प्रशासन इन आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों, पर्यावरण और बांगों बांध की चिंताओं को दरकिनार कर अडानी जैसी समूह को फायदा पहुंचाने इस इलाके को तबाह करने की कोशिश में जुटी है।
श्री शुक्ला ने बताया 2015 में राहुल गांधी छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे तो हसदेव क्षेत्र के ग्राम सभाओं में संवाद कर कहा था किसी भी कीमत पर हसदेव क्षेत्र के जंगल का विनाश नहीं होना चाहिए। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है जो अडानी की मदद कर रही है। उन्होंने कहा एक तरफ मोदी सरकार अडानी को सारे संसाधन सौंप रही, वहीं प्रदेश की भूपेश सरकार आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर जल, जंगल, जमीन उनको उपलब्ध करा रही है। गौरतलब हो कि हसदेव बचाओ पदयात्रा 13 अक्टूबर को राजधानी रायपुर पहुंचेगी, जहाँ राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।




