उपभोक्ता की तलाश में होलसेल और रिटेल मार्केट
भाटापारा। पहले लॉकडाउन ने मारा। अब कुक्कुट आहार में आई तेजी मार रही है। सीजन करीब आ चुका है लेकिन शुरुआत के दौर में जैसा उठाव होना चाहिए, वैसा होता दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि आहार की गर्मी से उत्पादन की कीमत भी बढ़ चुकी है। जैसे आसार बने हुए हैं, उसे देखते हुए अंडा-चिकन में भाव कम होने की संभावना नहीं है।
कोरोना और लॉकडाउन ने इस बाजार की गति पर जो ब्रेक लगाया, वह अब हटाया जा चुका है लेकिन इसने अब भी वैसी स्पीड नहीं ली है, जैसी होनी चाहिए। फार्म संचालकों के अनुसार इसके पीछे कुक्कुट आहार की बढ़ती कीमत, बड़ी वजह बन रही है। खरीदी तो हो रही है लेकिन मात्रा बेहद कम है क्योंकि कीमत बढ़ चुकी है। जबकि उत्पादन की गति सामान्य बनाए रखने के लिए आहार की खरीदी बराबर करनी पड़ रही है। लिहाजा संकट का दौर बरकरार है।
कुक्कुट आहार में गर्मी
मक्का, सोयाबीन और बाजरा जैसे कुक्कुट आहार की कीमत लगातार बढ़त ले रही है। इन सभी सामग्रियों की कीमत में 50 से 60 फ़ीसदी की तेजी के बाद फार्म तक पहुंच महंगे में पड़ रही है। ऐसे में अंडा, चिकन और दूसरे पोल्ट्री उत्पादन की कीमत में इजाफा करना मजबूरी माना जा रहा है। बढ़़त का असर उठाव पर सीधे पड़ने से एक बात सही साबित हो रही है कि संकट का दौर अभी भी खत्म नहीं हुआ है।
सीजन की निकल रही मांग
पोल्ट्री फॉर्म के लिए चालू माह को सीजन का शुरुआती माह माना जाता है लेकिन यह दौर जैसा बना हुआ है, उसे आने वाले दिनों के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। खरीदी तो हो रही है लेकिन मात्रा आधी से भी कम है। होलसेल और रिटेल मार्केट अब भी कीमत कम होने की राह देख रहा है।
अंडा हो रहा गर्म
होलसेल मार्केट में अंडा 550 से 570 रुपए सैकड़ा पर मिल रहा है, तो रिटेल काउंटर तक पहुंचते-पहुंचते यह 700 से 720 रुपए तक हो जा रहा है। चिकन को किचन तक पहुंचने में भी यही दिक्कत आ रही है। होलसेल काउंटर में 100 से 150 रुपए किलो पर मिल रहे चिकन को किचन तक पहुंचने के लिए 250 रुपए किलो के रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है।


