रायपुर। तेंदूफल के जूस में विटामिन ए, ई, डी और शर्करा पाई जाती है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ गठिया, जोड़ों को दर्द में सहायक होता है। रिसर्च के बाद तेन्दू फल से जूस बनाने की तकनीक विकसित की गई है।

 राज्यपाल अनुसुईया उइके से राजभवन में डॉ. आरके प्रजापति और शोध छात्रा चंद्रशिखा पटेल ने मुलाकात कर तेंदूफल का जूस प्रदान किया। राज्यपाल ने कहा कि तेंदूपत्ता से रोजगार की प्राप्ति होती है। अब तेंदूफल के जूस से भी उनकी आय होने की संभावना बढ़ जाएगी। इस जूस को पेटेन्ट कराने के लिए आवेदन करें। साथ ही ट्राईफेड को इस उत्पाद के प्रोत्साहन तथा अच्छा बाजार उपलब्ध कराने के लिए आग्रह किया जाएगा। इससे आदिवासियों को रोजगार भी प्राप्त होगा और वे सशक्त होंगे।

जोड़ों का दर्द करता है दूर

चंद्रशिखा ने बताया कि तेंदूफल जंगल में रह जाता है। पेड़ से गिरने के पश्चात आदिवासी इसे 3 से 4 रूपए किलो में बेच देते है। अच्छा बाजार नहीं मिलने के कारण यह सड़ जाता है। उनके द्वारा 10 ट्रिटमेन्ट के साथ आरटीएस और 10 ट्रिटमेंट के साथ नेक्टर बनाने के लिए उपयुक्त रेसिपी का निर्माण 03 माह के परिश्रम से सफल हुआ। तेंदूफल के जूस में विटामिन ए, ई, डी और शर्करा पाई जाती है। यह पौष्टिक होने के साथ-साथ गठिया, जोड़ों को दर्द में सहायक होता है।