भयहरण हनुमान और श्रीराम जानकी मंदिर गहिलानाला पेंड्रारोड रतनपुर में बुधवार तीन जून तक तो सब कुछ ठीक था। लंबी पृथ्वी लोक सेवा के बाद यहां के वासी रहे महंत दयाराम दास त्यागी का गो-लोक धाम गमन 19 मई 2026 को हुआ। जिनके आत्मा की शांति के लिए षोडशी भण्डारा 03 जून बुधवार को आयोजित कर संतजन और भक्तों को भोजन प्रसाद कराया गया था। सुबह से देर शाम तक भक्तिमय शांति पूर्ण वातावरण में सब कुछ तो संपन्न हो गया था। पोड़ी, लालपुर, घासीपुर सहित आसपास के जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की उपस्थिति बतौर मेजबान और मेहमान दोनों रुपों में रही। दिवंगत महंत दयाराम दास त्यागी से निकटता की वजह से इस आयोजन में मेजबान के रूप में बड़ी भूमिका नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप की स्वाभाविक तौर पर थी। इस आयोजन के पखवाड़ा बीत जाने के बाद तक ऐसी किसी अप्रत्याशित घटना के हो जाने की चर्चा तक नहीं हुई। अगर किसी घटना के हो जाने की सूचना रतनपुर थाने तक पहुंच थी तो इसकी कानाफूसी आस पास के गांव से लेकर रतनपुर शहर के जागरूक समाज के लोगों ने तक ने क्यों महसूस नहीं की। किसी के चरित्र हरण का मामला छोटा मोटा तो हो नहीं था, वो भी जब आरोप निर्वाचित जनप्रतिनिधि, शहर के प्रथम नागरिक पर लगे। आग लगी थी आसमान का धुआं कहां था ! हैरत में हैं तो संत समाज में भी इतनी खामोशी क्यों थी ! क्यों पखवाड़ा गुजर गया और सन्नाटा पसरा रहा।
देखिए चल चित्र https://youtu.be/LyqAiCAUYA4?si=5C5II1v6WS9J1bxZ
इस दौरान सोशल मीडिया पर षोडसी भंडारा के पंगत में बैठकर भोजन कर तृप्त होते साधू-संतों के चल चित्र भी तैरते रहे। जिसमें कथित पीड़ित भी साधू-संतों के साथ सहज रुप से पगत में ही बैठकर भोजन करती नजर आ रही है। मेजबान सेवादार तो सबको सम्मान जनक रुप से सेवा कर भोजन परोसते ही तो दिख रहे हैं। सब-कुछ सामान्य ही तो दिख रहा है। चल चित्र में पीछे से आती धीमी स्वर में आती भक्तिमय संगीत भी तो सुनाई पड रहा। कही से भी तो शोरगुल की आवाजें, कानाफूसी चलचित्र में दर्ज नहीं हो पाई।
… फिर ऐसा क्या हुआ कि पखवाड़े भर की खामोशी के बाद रतनपुर नगर पालिका परिषद के पक्ष विपक्ष और निर्दलीय पार्षदों के गठजोड़ होने के बाद कलेक्टर कार्यालय में अमृत मिशन और मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कामकाज की शिकायत के दूसरे ही रोज कथित साध्वी का पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में मीडिया के सामने प्रकट हो जाना । क्रमशः जारी…
किस्सा रोचक है ! कहानी है जर जोरू और जमीन की … जांजगीर से निकल कर जुना अखाड़ा होते हुए चपोरा और रतनपुर से जुड़े गांव में बीस डिसमिल जमीन के मालिक मकबूजा हो जाने तक की… धैर्य रखिए और भी बहुत कुछ है सच के करीब… करेंगे खुलासा… पढ़ते रहिए…. thecentral new.in
क्या है कथित साध्वी के आरोप
कथित जूना अखाड़ा की साध्वी का आरोप है कि भयहरण हनुमान मंदिर ग्राम फुलवारीपारा आश्रम चपोरा रोड में दयाराम दास के मृत्यु भोज के कार्यक्रम में गई थी। जहां संत महात्माओं के साथ भोजन करने बैठी थी। वहां आरोपी पहुंचकर मुझे भोजन करने नही दिया, उठा दिया। मेरा हाथ पकड़कर मेरा संत महात्माओं के सामने दुर्यव्वहार कर अश्लील हरकत करते उठा दिया। मान सम्मान को चोट पहुंचाने की कोशिश, जान से मारने की धमकी संतो के बीच दिया। आश्रम मे आकर मेरा विरोध करता है, झूठे मामले पर फंसाने की धमकी देता है।