किसान और मिलरों में पनपने लगा है तीखा आक्रोश
भाटापारा। जरूरत 8000 से 10000 कट्टा की। आवक महज 500 से 1000 कट्टा की। विवश हैं चावल उत्पादन की गति धीमी करने के लिए। आधार और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता अब बारीक चावल बनाने वाली इकाइयों पर भी भारी पड़ने लगी है।
भाव अच्छे हैं बारीक धान की सभी प्रजातियों में लेकिन आधार और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता से बारीक धान की फसल लेने वाले किसान अब बेतरह नाराज हो चले हैं। फलत: आवक रोकने जैसे फैसले मजबूरी में लिए जाने की खबरें आने लगीं हैं। इस फैसले से बारीक चावल बनाने वाली ईकाइयों का परिचालन संकट में आ चुका है।संकट में नियमित परिचालन

संकट में नियमित परिचालन
बारीक चावल के बाजार में शहर की चावल मिलें अहम स्थान रखतीं हैं। गुणवत्ता के हर मानक पर गंभीरता से ध्यान देने वाली यह इकाइयां बारीक धान की लगातार घटती आवक से परिचालन की गति धीमी करने के लिए विवश हैं। रोजाना की मांग 8000 से 10000 कट्टा के विपरीत आवक महज 500 से 1000 कट्टा पर आकर सिमट चुकी है। यक्ष प्रश्न- कब होगी स्थिति सामान्य?

नाराज हैं उत्पादक क्षेत्र
सरगुजा, कोरबा, कवर्धा, थान खम्हरिया, राजनांदगांव, पाली, कटघोरा और रतनपुर क्षेत्र में बड़े रकबे में विष्णुभोग , सियाराम और एच एम टी जैसी बारीक प्रजातियों के धान की फसल ली जाती है। लेकिन इस बार यहां के किसान रास्ते में होती जांच और जब्ती से बेहतर नाराज हैं। किसी तरह पहुंच गए, तो प्रांगण में आधार और ऋण पुस्तिका मांगी जा रही है इसलिए आवक पर अस्थाई रोक जैसे फैसले के लिए विवश हैं।

भाव अच्छे हैं
भाटापारा कृषि उपज मंडी की पहचान पूरे प्रदेश में एकमात्र ऐसी मंडी के रूप में है, जहां मोटा ही नहीं, बारीक धान की उच्चतम कीमत किसानों को मिलती है। प्रतिकूल स्थितियों के बावजूद इस समय एचएमटी में प्रति क्विटल भाव 2800 से 3000 रुपए, सियाराम 3200 से 3400 रुपए क्विंटल और विष्णुभोग 7000 से 7300 रुपए क्विंटल जैसी उच्चतम कीमत में खरीदा जा रहा है। यह कीमत दीर्घ अवधि तक बने रहने की संभावना है।
