बिलासपुर। अब ‘थूजा’ बचाएगा ध्वनि और वायु प्रदूषण से। सरु कुल के इस सदस्य पर हुए अनुसंधान में खुलासे के बाद नर्सरियों में इसके पौधे की मांग में एकाएक बढ़ोतरी देखी जा रही है।
बढ़ता शहरीकरण, हरित क्षेत्र का महत्व बढ़ा रहा है। हरित पट्टी के विकास के लिए थूजा को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह कम जगह में ज्यादा हरियाली प्रदान करता है। सबसे अहम गुण यह कि थूजा का पौधा तीन प्रकार का प्रदूषण रोकता है। ऐसे में रोपण को लेकर ज्यादा रुझान देखा जा रहा है।
ऐसा है थूजा
पर्यावरण संरक्षक माना जाता है थूजा के पौधे को। 40 से 100 वर्ष तक की औसत उम्र वाली यह प्रजाति 3 से 15 मीटर तक ऊंचाई हासिल करती है। हल्की से गहरी हरी रंग वाली पत्तियाँ छोटी, चपटी और शल्क के समान होती है। मध्यम गति से बढ़वार लेने वाला यह पौधा कम पानी में भी तैयार हो जाता है। घनी बनावट और घनी हरियाली की वजह से उद्यान, शासकीय भवन और शिक्षण संस्थानों में रोपण के लिए अहम माना जा रहा है।

है यह पर्यावरणीय महत्व
थूजा में वायु प्रदूषण कम करने वाले गुणों के साथ ध्वनि प्रदूषण अवशोषित करने के गुणों का खुलासा हुआ है। सबसे अहम गुण यह मिला है कि कार्बन अवशोषण करके जलवायु संतुलन भी बनाए रखता है थूजा। बढ़ते शहरीकरण की वजह से हरित क्षेत्रों में कमी आती देखकर इसके रोपण को लेकर इसलिए जागरुकता बढ़ रही है क्योंकि यह छोटी सी जगह में ज्यादा हरियाली प्रदान करने वाला एकमात्र पौधा है।
यह औषधिय महत्व
थूजा की पत्तियों से निकाले जाने वाले तेल से त्वचा रोग खत्म करने वाली औषधियाँ बनाई जाती हैं। मस्से खत्म करने में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। श्वसन विकार दूर तो करता ही है साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाने में मददगार है थूजा लेकिन उपयोग के पूर्व चिकित्सकीय परामर्श को आवश्यक माना है वानिकी वैज्ञानिकों ने क्योंकि मानक से ज्यादा उपयोग स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है थूजा
थूजा सीमित स्थान में अधिक हरियाली देने वाला पौधा है, जो वायु व ध्वनि प्रदूषण को कम करने के साथ कार्बन अवशोषण द्वारा पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है। शहरी क्षेत्रों में हरित पट्टी विकास के लिए इसका रोपण अत्यंत उपयोगी है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
