बिलासपुर। उठाव के दिन हैं लेकिन शॉर्ट है सप्लाई इसलिए 5700 से 5800 रुपए क्विंटल पर पहुंचा हुआ है महुआ। नई फसल मई में आएगी लेकिन कमजोर मांग के बावजूद बबूल बीज मजबूती का संकेत दे रहा है। निर्यात के द्वार बंद होने के बावजूद चरोटा में आ रही गर्मी से हैरत में है वनोपज बाजार।
रबी फसल की तैयारी अंतिम दौर में पहुंच रही है। वनोपज बाजार में चहल-पहल बढ़ने लगी है लेकिन मांग के दिन और बेहतर भाव के बावजूद महुआ की आवक बेहद कमजोर है। इसलिए भाव आसमान छूने लगे हैं। मई में आएगी बबूल बीज की नई फसल। भरपूर भंडारण और सीमित मांग की वजह से ठहरी हुई है कीमत पर चरोटा में आया तेजी का तूफान वनोपज बाजार की हैरत बढ़ा रहा है।

सीजन ऑन, सप्लाई शाॅर्ट
पहले मदिरा, अब बनने लगे हैं फूड प्रोडक्ट भी। यह दूसरा ऐसा उपभोक्ता क्षेत्र है, जिसने महुआ बाजार को विस्तार दिया हुआ है। ऐसे में मांग का दोहरा दबाव महसूस कर रहा है महुआ बाजार लेकिन सघन जांच, संग्राहकों की बाजार तक पहुंच में बाधा बन रही है। इसलिए कोल्ड स्टोर में भंडारित महुआ का विक्रय किया जा रहा है। कीमत प्रति क्विंटल 5700 से 5800 रुपए बोली जा रही है।

निर्यात बंद फिर भी…
निर्यात की प्रतीक्षा कर रहा है बीते 3 साल से चरोटा लेकिन संभावना के बीच निर्यातकों की खरीदी चालू हो चुकी है। इसलिए पुराना चरोटा 2400 से 2500 रुपए क्विंटल और नया चरोटा में 2600 से 2800 रुपए क्विंटल पर सौदे हो रहे हैं। वनोपज बाजार चरोटा में आ रही इस अनपेक्षित तेजी को देखकर हैरत में है। धारणा तेजी की इसलिए भी व्यक्त की जा रही है क्योंकि निर्यातकों की खरीदी में निरंतरता बनी हुई है।

सबसे पीछे बबूल
भरपूर है हरा चारा की उपलब्धता इसलिए पशु आहार बनाने वाली ईकाइयों की मांग बबूल बीज में नहीं के बराबर है। नई फसल मई में आएगी तब तक बाजार ऐसे ही रहने की धारणा है। रही बात उत्पादन की, तो पुष्पन की स्थितियों को देखकर माना जा रहा है कि उत्पादन मांग के अनुरूप ही रहेगा। ऐसे में बबूल बीज 1600 से 1700 क्विंटल पर शांत है।

सीजन चालू महुआ में
महुआ में उठाव चालू हो चला है लेकिन संग्राहकों की पहुंच वनोपज बाजार तक नहीं है। इसलिए कोल्ड स्टोरेज में रखे महुआ के सौदे हो रहे हैं। बबूल शांत है लेकिन चरोटा में आगे भी तेजी की धारणा है।
- सुभाष अग्रवाल, एसपी इंडस्ट्रीज, रायपुर
