भाटापारा। आवक शुरू। खरीदी चालू लेकिन परेशान हैं किसान, आधार और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता से। हताश हैं पोहा मिलें धान की बढ़ती कीमत से।
चार दिवस अघोषित बंद जैसी स्थितियों के बाद पांचवें दिन कृषि उपज मंडी प्रांगण में काम चालू तो हो गया लेकिन प्रतिकूल स्थितियां पूरी मजबूती के साथ अभी भी नजर आ रहीं हैं।
रौनक रही गायब
22 दिसंबर से 26 दिसंबर तक अघोषित बंद जैसी स्थितियां रहीं। 27 दिसंबर की सुबह आवक शुरू तो हुई लेकिन उत्साहजनक आंकड़े से दूरी बनी रही। लगभग 1000 कट्टा की आवक और 2600 से 2680 रुपए क्विंटल पर सौदे की खबरें हैं। इधर बारीक धान और दलहन-तिलहन में भी स्थितियां संतोषजनक नहीं है।

बेबस हैं किसान
आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता किसानों पर पूरी सख्ती के साथ अभी भी प्रभावी है। कड़ाई इतनी ज्यादा है कि रबी फसल का विक्रय करने वाले किसान भी इस नियम के घेरे में लिए जा चुके हैं। समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिश में समय पर टोकन जारी नहीं होना जैसी समस्या अब भी बनी हुई है। कहां जाएं किसान ?
बढ़ रही हताशा
पोहा क्वालिटी के धान की जो कीमत बोली जा रही है, उसकी वजह से उत्पादन लागत और पोहा की कीमत भी बढ़ रही है जबकि उपभोक्ता मांग जस- की- तस है। हताशा इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि कच्ची सामग्री की खरीदी, परिवहन और भंडारण तक के हर चरण की रोजाना बेहद सख्ती के साथ जांच की जा रही है।

सख्ती पड़ रही भारी
पोहा मिलों में काम करने वाले कुशल और अकुशल 22000 से 25000 श्रमिकों पर भी प्रशासन की सख्ती गहरे तक असर डाल चुकी है क्योंकि संचालन की गति बेहद धीमी है। कड़ाई का असर उन 2000 से 2500 श्रमिकों पर भी देखा जाने लगा हैं, जो मंडी प्रांगण में कटाई, पाला करने, भराई, तौलाई, लोडिंग और अनलोडिंग जैसे काम के जरिए रोजी-रोटी की व्यवस्था करते हैं।
