भाटापारा। कीमत जरूर ज्यादा है लेकिन पसंद आ रहा है कुम्हड़ा बड़ी का स्वाद। उत्सुकता के साथ खरीदी जा रही जिमीकंद की बड़ी को जैसा प्रतिसाद मिल रहा है, उसके बाद हल्की शॉर्टेज जैसी स्थिति बनती नजर आ रही है।

कुछ झिझक और थोड़े संकोच के बीच लांच की गई छत्तीसगढ़ी बड़ी- बिजोरी में मांग इतनी निकलेगी सोचा नहीं था देवांगन खजूर वाला के संचालक हेमंत देवांगन ने। प्रयोग के तौर पर प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी व्यंजन अईरसा को बाजार में पेश किया गया।अब यह रोज बनाया जाने लगा है।

कुम्हड़ा और जिमीकंद की बड़ी

पीढ़ियों से बनाया और सेवन किया जाता रहा है लाई और रखिया बड़ी का। आसान नहीं था इन दोनों के बीच कुम्हड़ा और जिमीकंद की बड़ी का प्रवेश। स्वाद में थोड़ा परिवर्तन करके बनाया और सीमित मात्रा में काउंटर पहुंचाया गया। हाथों- हाथ लिया कुम्हड़ा और जिमीकंद की बड़ी को उपभोक्ताओं ने। अगली पेशकश की फूलगोभी और मुनगा बड़ी की। प्रतिसाद इन दोनों को भी खूब मिल रहा है।

400 से 600 रुपए किलो

सब्जियों की कीमत असामान्य रूप से ज्यादा है। जरूरी दलहन भी महंगे हैं। इसलिए स्वाभाविक था बड़ियों की कीमत में तेजी का आना, यही वजह है कि रखिया, लाई, कुम्हड़ा, गोभी,मुनगा और जिमीकंद से बनाई गई बड़ियों में न्यूनतम कीमत 400 रुपए और अधिकतम कीमत 600 रुपए किलो पर पहुंची हुई है। कीमत में स्थिरता की धारणा है।

अईरसा अब रोज

उम्मीद से कहीं ज्यादा मांग है प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी व्यंजन अईरसा में। हर उपभोक्ता वर्ग में पसंद किया जाने वाला यह व्यंजन अब प्रतिदिन निर्माण की सूची में आ चुका है। हाल ऐसा है कि यह शहरी बाजार से निकलकर ग्रामीण साप्ताहिक बाजार में भी जगह बना चुका है।