भाटापारा। अंतरप्रांतीय कारोबार जरा भी नहीं। अंतर जिला थोड़ा-थोड़ा। कुछ ऐसा ही हाल लोकल का भी है। यह तब, जब ओल्ड जूट बैग का सीजन शिखर पर पहुंचा हुआ है।

बेहद ढीला है इस बार पुराने बारदाने का बाजार। जैसी स्थितियां बनीं हुईं हैं, उसे देखते हुए पुराने बारदाने की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है क्योंकि अब यह क्षेत्र भी प्रतिस्पर्धी हो चला है।

पहली बार शांत है

छत्तीसगढ़ के ओल्ड जूट बैग मार्केट को हमेशा से उत्तर प्रदेश के आलू-प्याज किसानों और कारोबारियों का सहारा मिलता रहा है। यह इस बार शांत है क्योंकि प्लास्टिक की बोरियों की खरीदी को प्राथमिकता दे रहे हैं, आलू-प्याज उत्पादक किसान और स्टॉकिस्ट तथा कारोबारी। ऐसे में पुराने बारदाने का एक बड़ा हिस्सा विक्रय से छूट जाने की आशंका है। इसी तरह मध्य प्रदेश और उड़ीसा की खरीदी भी बंद है।

थोड़ा-थोड़ा

बिलासपुर, बेमेतरा, दुर्ग, मुंगेली और सारंगढ़ जिले से भी ओल्ड जूट बैग में डिमांड बेहद कमजोर है। आंशिक मांग रायपुर जिले से निकली हुई है लेकिन ओल्ड जूट बैग मार्केट इसे उत्साह बढ़ाने वाला नहीं मान रहा है। स्थानीय मांग को लेकर यह कहा जा रहा है कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के पास ओल्ड बैग का भरपूर भंडारण है, तो किसानों की खरीदी एक तरह से बंद ही है क्योंकि फसल कटाई का काम अभी भी जारी है।

गला काट प्रतिस्पर्धा

अंतरप्रांतीय, अंतर जिला, स्थानीय डिमांड ओल्ड जूट एवं ओल्ड प्लास्टिक बैग में लगभग पूरे साल रहने लगी है। इसलिए कारोबारी क्षेत्र भी गलाकाट स्पर्धा के घेरे में आ चुका है। इसलिए कीमत एक स्तर पर ठहरी हुई है। फिर भी ओल्ड जूट बैग में 15,19,20 और 25 रुपए प्रति नग जैसी कीमत बोली जा रही है। बुरा हाल प्लास्टिक की बोरियों में भी बना हुआ है, जो 12,13 और 15 रुपए प्रति नग की दर पर उपलब्ध है। शक्कर, सूजी, मैदा, आटा और उर्वरक की बोरियां 5 से 7 रुपए में उपलब्ध होने लगीं हैं।