भाटापारा। रिपर कम। ट्रक हार्वेस्टर ज्यादा। चल तो रहे हैं चैन हार्वेस्टर लेकिन विवशता में क्योंकि खेत गीले हैं। हमेशा से आगे रहने वाला ट्रॉली इस बार भी सबसे आगे है।
कृषि उपकरणों की डिमांड अब बढ़ते क्रम पर है। फिलहाल सबसे आगे ट्रक हार्वेस्टर और थ्रेशर के साथ ट्रॉली है। कीमत में आंशिक वृद्धि के बावजूद पूछ-परख के साथ एडवांस सौदे की खबर आने लगी है।

रिपर कम, ट्रक हार्वेस्टर ज्यादा
छोटे किसानों ने शुरुआती दौर में रिपर की खरीदी को लेकर खूब उत्साह दिखाया था लेकिन हार्वेस्टर से कटाई और मिसाई दोनों काम एक साथ होता देखकर रिपर के उपयोग और खरीदी दोनों से हाथ खींच लिया। कीमत की बात करें, तो रिपर की ताजा कीमत 1 लाख 10 हजार रुपए बोली जा रही है जबकि हार्वेस्टर 28 लाख रुपए पर पहुंचकर और भी बढ़त का संकेत दे रहा है।

प्रतीक्षा किसानों की
गीले खेतों की फसल कटाई के लिए हमेशा से उपयुक्त माना जाता रहा है चैन हार्वेस्टर को लेकिन धीमी गति की वजह से किसानों की पसंद से दूर हो रहा है यह कृषि उपकरण। कृषि उपकरण बाजार इसे देखते हुए अग्रिम ऑर्डर पर ही इसकी बुकिंग ले रहा है। फिलहाल इस चैन हार्वेस्टर की कीमत 24 लाख रुपए बताई जा रही है।

पहली पसंद थ्रेशर
हाथों से कटाई के बाद मिसाई के लिए थ्रेशर अभी भी किसानों की पहली पसंद बना हुआ है। लगभग सभी ट्रैक्टर मालिकों के पास इसका होना अनिवार्य माना जा चुका है क्योंकि सभी फसलों की मिसाई करना आसान है। इसलिए कृषि उपकरण निर्माता और विक्रेताओं की प्राथमिकता में रहता है थ्रेशर। पूछ-परख और मांग बढ़ते क्रम पर है। फिलहाल यह 2 लाख 20 हजार रुपए में मिल रहा है।

सबसे आगे
रिपर हो या हार्वेस्टर। या फिर थ्रेशर। आवश्यक है ट्रॉली का होना। चलन बढ़ रहा है हाइड्रोलिक ट्राॅली का लेकिन सामान्य ट्रॉली अभी भी शिखर पर है। 2 लाख 60 हजार रुपए कीमत भी स्वीकार की जा रही है क्योंकि हर सामग्री आसानी से परिवहन की जा सकती है। इसलिए कृषि उपकरणों के बाजार में सबसे ज्यादा मांग ट्राॅली की ही है।
सीजन इनका भी
रबी सत्र में भरपूर उपयोग होता है सीड ड्रिल का। इसकी कीमत 52 हजार रुपए पर स्थिर है। कल्टीवेटर भी 22 हजार से 30 हजार रुपए के बीच लिए जा सकते हैं जबकि केजव्हील 13 हजार से 17 हजार रुपए पर मजबूत है।
रुझान बढ़िया
कृषि उपकरणों के बाजार में ट्राॅली हमेशा से मांग में रहता आया है लेकिन अवसर फिलहाल हार्वेस्टर और थ्रेशर का है। इसलिए किसानों की पूछ-परख को देखते हुए बेहतर की आस है।
- प्रदीप अग्रवाल, ऋषभ ट्रैक्टर्स, भाटापारा
