भाटापारा। 180 रुपए नहीं, 200 रुपए सैकड़ा। यह उस वेस्ट कन्वेयर बेल्ट के टुकड़े की कीमत है, जिसका उपयोग कटाई के बाद फसल बांधने के लिए किया जाता है।

रबी फसल की कटाई चालू। शुरू हो चला है एक ऐसी सामग्री का बाजार जिसके आने के बाद ‘पैरा से डोर’ बनाने का चलन लगभग खत्म होने की स्थिति में आ चुका है लेकिन अब इसका विकल्प वेस्ट कन्वेयर बेल्ट से बना ‘डोर’ भी महंगा हो चला है।

इसलिए बढ़ रहा चलन

पैरा से रस्सी बनाने वाले अब समाप्ति की ओर है। ऐसे में कटाई के बाद फसल बांधने के लिए जूट या नारियल के रेशों से बनी रस्सियां खरीदी गई लेकिन महंगा और कमजोर था यह विकल्प। ऐसे में सीमेंट और पावर प्लांट के अनुपयोगी हो चुके कन्वेयर बेल्ट को आजमाया गया। सफल रही यह कोशिश क्योंकि अन्य विकल्पों की तुलना में न केवल सुरक्षा बल्कि मजबूती भी बेमिसाल थी।

यहां से वहां तक

समूचे बलौदा बाजार के बाद अब पड़ोसी बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा और कोरबा जिले के किसान कटाई के बाद फसल बांधने के लिए शहर से ऐसे बेल्ट खरीद रहे हैं। होलसेल मार्केट अब सारंगढ़, सक्ती, दुर्ग और धमतरी जिले में भी विस्तार की संभावना तलाश रहा हैं क्योंकि यह जिले भी खेती-किसानी के मामले में प्रदेश में अहम स्थान रखते हैं।

आई तेजी 20 रुपए की

लगभग 3 से 4 सेंटीमीटर चौड़े एवं 5 से 6 फीट की लंबाई में मिल रहे, इस बेल्ट की भी कीमत में भी तेजी आ चुकी है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होकर नवंबर अंत तक के इसके बाजार में नई कीमत 200 रुपए सैकड़ा बोली जा रही है। बीते साल की तुलना में सैकड़ा पीछे 20 रुपए की तेजी के बावजूद शुरुआती मांग उत्साह बढ़ाने वाली मानी जा रही है।