तिल जौ तर्पण किए बिना शोक संतप्त परिजनों के घर लौटने की बेचारगी

                   बुद्धिसागर सोनी

रतनपुर।  कृष्णार्जुनी तट पर स्थित मुक्तिधाम में नगर के दो वरिष्ठ नागरिकों का बीते दिन दाह संस्कार हुआ।  कपालक्रिया के बाद कठियार और परिवार स्नान तर्पण के लिए तालाब के घाट में पहुंचा। तालाब के पानी से दुर्गंध उठ रहा था। गहरे हरे पानी के ऊपर कुछ रसायन तैर रहे थे।  ऐतिहासिक तालाब का पानी छूने लायक भी नहीं था।
      तिल जौ तर्पण किए बिना घर लौटने की बेचारगी से बचने अंतिम यात्रा में शामिल बुद्धिजीवियों ने महामाया ट्रस्ट से टेंकर में पानीं मंगाकर मोतीचंद दाऊ की आत्मा को तर्पण दिया।  इस घटना एक खास पहलू यह कि दाऊ के आत्मा के साथ मंगल धोबी की आत्मा को भी टेंकर का पानी मिला , वरना ….?  मंगल धोबी भी दाऊजी जितना नामचीन थे।  चारकोसी गांव में लोग उन्हें जानते पहचानते थे। 
      दुर्दशा और दुरुपयोग का यही आलम रहा तो तालाबों की नगरी रतनपुर का ऐतिहासिक कृष्णार्जुनी तालाब कुछ सालों में अपना अस्तित्व खो देगा।   नगर की आधी आबादी को निस्तारजल मुहैया कराने वाली कृष्णार्जुनी तालाब स्थानीय स्वायत्तशासी नगरीय प्रशासन के भ्रष्टाचारयुक्त ठेकाप्रणाली के कारण मृतप्राय हो चुका है।  नगरीय निकाय का प्रशासनिक और कार्मिक अमला स्वार्थलोलुप परिषदीय आसंदी के निरापदता का बेजा लाभ उठा रहा है।
       

निकाय के अधिकारी एवं कर्मचारी के कार्यप्रणाली पर नजर डालें तो सवाल उठता है, क्या दाऊजी और मंगल धोबी के दशकर्म संस्कार को कृष्णार्जुनी के तट पर व्यवस्थित घाट-चबूतरा और साफ पानी मिल पायेगा? 
      रतनपुर को मंदिर और तालाबों का नगर कहा जाता है।   छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद  पर्यटन स्थलों के विकास हेतु केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा अनेकों योजनाएं चलाई जा रही है।  रतनपुर नगरीय निकाय पूर्णतः साधन संपन्न होकर भी इन सरकारी योजनाओं का लाभ नगर के तालाबों को दिलाने में नाकाम रहा है। चाहे डबल ट्रिपल इंजन सरकार हो या सिंगल इंजन टायर ट्रेन नगरीय निकाय में आने तक योजनाओं का पहिया पंचर हो जाता है।
       बहरहाल इस शर्मनाक त्रासदी के निदान हेतु वार्ड २, ३, ४ एवं ५ के नागरिकों द्वारा तहसीलदार रतनपुर को आवेदन देकर नगर पालिका प्रशासन को कार्यवाही हेतु निर्देशित करने का आग्रह किया गया है। देखना है कि दाऊजी और मंगल धोबी का सह-प्रयाण कितना रंग लाता है।