भाटापारा। शार्टेज की ओर बढ़ रही है उर्वरक की खाली बोरियां। इसलिए डिमांड आटा, सूजी, मैदा और शक्कर की प्लास्टिक की बोरियों में निकल रही है।

जूट बैग की कीमतों में तेजी के बाद मांग का प्रवाह अब सस्ते विकल्प की ओर जाता हुआ नजर आ रहा है। इसलिए तेजी विकल्प के तौर पर उपलब्ध, प्लास्टिक की बोरियों में आने लगी है।

दोगुने के करीब

उपलब्ध है प्लास्टिक की नई बोरियां भी लेकिन मांग आटा-सूजी-मैदा और शक्कर की पुरानी बोरियों में ज्यादा है। इसलिए किसान अग्रिम तैयारी के तहत् इनकी खरीदी 8 से 10 रुपए प्रति नग की दर पर कर रहे हैं। मांग ने फिलहाल जोर नहीं पकड़ा है लेकिन बढ़ने की संभावना को देखते हुए ओल्ड बैग मार्केट पड़ोसी जिलों से एडवांस सौदे कर रहा है।

बढ़ रहे इंतजार के दिन

जूट बैग के बाद उर्वरक की खाली बोरियों का उपयोग किसान ज्यादा करते हैं लेकिन इस वर्ष उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं होने की पक्की धारणा व्यक्त की जा रही है क्योंकि उर्वरक की दिक्कत अभी भी बनी हुई है। इसके असर से इस किस्म की बोरियों की कीमत असाधारण रूप से बढ़ने की पूरी आशंका है।

खुश है पैबंद बारदाना

पैबंद लगा बारदाना इस बार खुश है क्योंकि इंतजार के बाद मांग निकल रही है। बीते बरस 7 से 9 रुपए प्रति नग पर बिक चुका पैबंद लगा बारदाना सीजन की शुरुआती दौर में ही 9 से 10 रुपए प्रति नग पर बोला जा रहा है। हल्की तेजी के बाद भी कीमत क्रय शक्ति के भीतर ही मानी जा रही है इसलिए मांग के अनुरूप उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश में है ओल्ड जूट बैग मार्केट।