डबल इंजन सरकार में ‘दिव्यांग’ मंत्री के सपने
खबर है कि तोखन साहू आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री, भारत सरकार ने दिनांक 08 जुलाई 2025 को पत्र प्रेषित कर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित महामाया मंदिर रतनपुर को ‘प्रसाद’ योजना में शामिल कर विकास करने के संबंध में संस्कृति मंत्री एवं पर्यटन मंत्री भारत सरकार गजेन्द्र सिंह शेखावत से अनुरोध किया है।
संस्कृति मंत्री एवं पर्यटन मंत्री भारत सरकार शेखावत ने बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और राज्य मंत्री साहू के लिखे पत्र का जवाब ठीक एक महीने बाद देकर अवगत कराया है कि उनके पत्र को उचित कार्यवाही हेतु मंत्रालय में संबंधित अधिकारी को प्रेषित कर दिया गया है। ( यानी अभी स्वीकृति नहीं मिली है।)

लोकसभा के गठन के बाद भारत सरकार में आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री का शपथ लेकर लौटे सांसद और मंत्री साहू ने अपने बिलासपुर लोकसभा सभा क्षेत्र के हजार साल पुरानी छत्तीसगढ़ की राजधानी रहे ऐतिहासिक और धार्मिक, पौराणिक महत्व के रतनपुर शहर व महामाया मंदिर को पर्यटकों के सहूलियतों के अनुकूल विकसित करने के लिए ‘कारीडोर’ बनाने के करोड़ों रुपए की परियोजना के सपने अंचल के लोगों को परोसे। तब के अखबार इसके दस्तावेजी साक्ष्य है। आप चाहें तो अपनी उंगलियों को थोड़ी हरकत देकर मोबाइल पर गुगल बाबा की सेवा लेकर इसकी पुष्टि कर सकते हैं।

ठीक ऐसे ही तब के बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और अब के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने भी रतनपुर स्थित महामाया देवी मंदिर को को ‘प्रसाद’ योजना में शामिल करने की मांग तात्कालीन समय में भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय से की थी। उनकी इस पहल पर PRASHAD ‘प्रसाद’ योजना के तहत निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार परियोजना प्रस्ताव तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की सलाहकार संस्था ईआरएनएसटी एंड यंग एलएलपी llp को निर्देशित किया गया था। इस पर संस्था के सलाहकार और पर्यटन अधिकारी ने रतनपुर का स्थल निरीक्षण कर कांसेप्ट प्लान तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थलों के निरीक्षण एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आंकलन करने के लिए स्टेक होल्डर्स अन्य जनप्रतिनिधि एवं जिला प्रशासन से चर्चा के लिए रतनपुर आए। दोनों अधिकारियों ने दो दिन रुक कर कांसेप्ट प्लान तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ राजस्व, और वन विभाग का अमला राजस्व भूमि व वन भूमि की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए मौजूद रहे। वहीं अधिकारियों ने प्रस्तावित योजना से प्रभावित स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर कांसेप्ट प्लान व परियोजना प्रस्ताव तैयार करने की भी जरूरत नहीं समझी। इस परियोजना तैयार करने में अधिकारियों की गंभीरता और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे थे। जिस ऊर्जा के साथ तत्कालीन सांसद अरुण साव ने अंचल के लोगों को ‘प्रसाद’ के सपने परोसे थे। उनके कार्यकाल के खत्म होने तक हवा हवाई हो गए। अब जबकि तत्कालीन सांसद अरुण साव छत्तीसगढ़ राज्य के उप मुख्यमंत्री हो गए हैं उनका डेढ़ साल से ज्यादा का कार्यकाल गुजर चुका है। केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार है तब भी उनका ‘प्रसाद’ जमीन पर कहीं नहीं है। ये उनकी नियत पर सवाल खड़े कर रहा है। क्या सच में डबल इंजन सरकार में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री दिव्यांग है जो अपने ही प्रस्तावित योजना को छह साल के लंबे अरसे बाद भी साकार करने में भी अक्षम और नाकाम हैं।

छप्पन इंची सीनाधारी ओजस्वी प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में छत्तीसगढ़ राज्य से तोखन साहू अकेले मंत्री हैं। भारत सरकार में आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री का रसूख है। अरबों-खरबों की बजट वाला मंत्रालय है। छत्तीसगढ़ में तीस हजार आबादी का शहर रतनपुर उनके अपने सपने ‘कारीडोर’ जैसा कि उन्होंने ने परोसे हैं, के लिए भी उनके अपने मंत्रालय में कुछ करोड़ रुपए आबंटित करा लाने की हैसियत नहीं है ! इसे उन्होंने संस्कृति मंत्री एवं पर्यटन मंत्री भारत सरकार गजेन्द्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर साबित भी कर दिया है ? उनका यह पत्र तब जनप्रतिनिधि के रुप में स्वाभाविक होता जब उन्होंने कारीडोर के सपने अपने ही अंचल के लोगों को परोस कर प्रोपोगंडा नहीं कराएं होते। ये तो केला बो कर कुंदरु तोड़ने की तैयारी है मंत्री जी …!

भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय ने साल 2014-15 में चिंहित तीर्थ स्थलों के समग्र विकास के उद्देश्य से ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन पर राष्ट्रीय मिशन’ शुरू किया गया था। अक्तूबर 2017 में इस योजना का नाम बदलकर ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान’ यानी ‘प्रसाद’ राष्ट्रीय मिशन कर दिया गया। इसका उद्देश्य महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय, वैश्विक तीर्थ और विरासत स्थलों का कायाकल्प एवं आध्यात्मिक संवर्द्धन, समुदाय आधारित विकास का पालन करना, स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करना, आजीविका उत्पन्न करने के लिये विरासत शहर, स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, व्यंजन आदि का एकीकृत पर्यटन विकास, संरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिये तंत्र को सुदृढ़ बनाना है। विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचा विकसित करना, इसके तहत चिंहित परियोजनाओं को संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की सरकार द्वारा चिंहित एजेंसियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जाना है। इसके तहत पर्यटन मंत्रालय द्वारा चिंहित स्थलों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) मिलती है। योजना के तहत सार्वजनिक वित्तपोषण के घटकों के लिये शत-प्रतिशत निधि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। परियोजना की बेहतर स्थिरता, निरंतरता के लिये सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को भी शामिल किया गया है।

इन शहरों को मिला ‘प्रसाद’
योजना के पहले चरण में कामाख्या (असम), अमरावती (आंध्र प्रदेश) , द्वारका (गुजरात), गया (बिहार), अमृतसर (पंजाब), अजमेर (राजस्थान), पुरी (ओडिशा), केदारनाथ (उत्तराखंड), कांचीपुरम (तमिलनाडु), वेलनकन्नी (तमिलनाडु), वाराणसी (उत्तर प्रदेश) व मथुरा उत्तर प्रदेश, बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ आदि को अब तक ‘प्रसाद’ मिला हैं ।
