दबाव में मूंगफली और राजगीर भी
बिलासपुर। उत्पादन कमजोर। उत्तर प्रदेश और गुजरात की तिल में गर्मी का दौर चल पड़ा है। तेवर लोकल तिल भी दिखा रही है क्योंकि मांग के दिन आ गए हैं। कुछ ऐसा ही हाल गुड़ में भी देखा जा रहा है जबकि शक्कर शांत है।
माह भर पहले ही इस बार तिल का बाजार शुरू हो चुका है क्योंकि मौसम का पूरा साथ मिल रहा है। डिमांड, रेडीमेड लड्डू और पापड़ी बनाने वाली इकाइयां भी कर रहीं हैं। यह भी तिल, मूंगफली और राजगीर में तेजी को गति दिए हुए हैं।

सफेद शांत, काली गर्म
गुजरात और उत्तर प्रदेश। यह दो प्रांत देश में सबसे बड़े तिल उत्पादक प्रांत है। दोनों ही जगह तिल के उत्पादन में गिरावट आ गई है। जबकि मांग पूर्ववत स्तर पर बनी हुई है। सप्लाई लाइन कमजोर होने की वजह से उत्तर प्रदेश की काली तिल 140 से 200 रुपए किलो पर पहुंच गई है, तो गुजरात की फसल भी इसी स्तर पर कायम है। लोकल तिल में फसल लगभग शून्य है। फिर भी उपलब्ध तिल में कीमत 140 से 190 रुपए किलो बोली जा रही है। कमजोर मांग के बावजूद सफेद तिल 170 से 220 रुपए किलो पर मजबूत है।

गर्म मूंगफली और राजगीर
मौसम का साथ मूंगफली को भी बराबर मिल रहा है। सीजन की मांग भी निकली हुई है। ऐसे में मूंगफली दाना 100 से 140 रुपए किलो जैसी उच्च कीमत पर जा पहुंचा है। पीछे वह राजगीर भी नहीं है, जिसका सेवन पापड़ी और लड्डू के रूप में होता है। घरेलू मांग जरूर कमजोर है लेकिन लघु और मध्यम इकाइयों की मांग में बराबर बना हुआ है राजगीर। इसलिए कीमत 120 से 180 रुपए किलो पर बोली जा रही है।

यू पी आगे, लोकल पीछे
अरसे बाद गुड़ बाजार में लोकल गुड़ की मांग में कमी देखी जा रही है। इसलिए कीमत प्रति किलो 40 से 50 रुपए पर स्थिर है जबकि उत्तर प्रदेश का गुड़ मांग के दबाव में है। ऐसे में यह 55 से 65 रुपए किलो की कीमत पर मजबूत है। राहत वह शक्कर दे रही है, जो 40 से 45 रुपए किलो पर शांत है।
