रिपर कमजोर, मजबूत लेबलर
भाटापारा। हताश कर रहा हार्वेस्टर। औसत रही थ्रेशर की खरीदी नवरात्रि पर। अब बेहतर की उम्मीद है फसल कटाई के पूर्व निकालने वाली मांग से।
कृषि उपकरणों के लिए नवरात्रि सबसे अच्छा समय माना जाता है लेकिन पहली नवरात्रि ऐसी रही जब मांग में सुस्ती बनी रही। अब दूसरा अवसर बेहद करीब है, जब फसल कटाई का दौर चालू होगा। इसलिए हार्वेस्टर, थ्रेशर, रिपर और लेबलर विक्रय करने वाली संस्थानें उम्मीद लगाए बैठीं हैं, बेहतर मांग और अच्छे कारोबार की।

हताश कर रहा हार्वेस्टर
बीते 4 साल से हार्वेस्टर का उपयोग बढ़ा हुआ है। पंजाब और हरियाणा से आते रहे हैं, किराए पर चलने वाले हार्वेस्टर लेकिन अच्छे परिणाम को देखते हुए अब अपने जिले के किसानों ने भी खरीदी को लेकर रुझान दिखाया हुआ है। संख्या भले ही कम हो लेकिन रुझान आगे के दिनों के लिए बेहतरी का संकेत दे रहे हैं। पहली ऐसी नवरात्रि रही, जब हार्वेस्टर में खरीदी लगभग शून्य रही है। कीमत 16 लाख 50 हजार रुपए।

औसत रहा थ्रेशर
लगभग हर गांव में थ्रेशर ने पहुंच बना ली है। हार्वेस्टर के बाद सबसे ज्यादा भरोसा किसान थ्रेशर पर ही करते हैं। नवरात्रि और नई फसल के पूर्व के दिन, सीजन के दिन माने जाते हैं। पहली ऐसी नवरात्रि रही, जब थ्रेशर की खरीदी औसत ही रही जबकि रुझान जोरदार देखा जा रहा था। इसलिए कृषि उपकरण बेचने वाली संस्थानों ने निर्माण इकाइयों को अग्रिम ऑर्डर पर फिलहाल ब्रेक लगाया हुआ है। कीमत 2 लाख 20 हजार रुपए।

दिन बहुरे इनके
ऐसे किसान जो हार्वेस्टर नहीं ले सकते, उनके लिए रिपर आदर्श माना जा रहा है। 1 लाख 25 हजार रुपए जैसी कीमत, क्रय शक्ति के भीतर मानी जा रही है। लिहाजा खरीदी पूर्व पूछ-परख को देखते हुए मांग निकलने की संभावना बन रही है। कृषि उपकरण निर्माण और विक्रय करने वाली संस्थानों को लेबलर की मांग और खरीदी राहत दे रही है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के साथ शहरी क्षेत्र में भी कामकाज के अवसर मिल रहे हैं। कीमत 14 से 15 हजार रुपए।
