
उपवास के दौरान सेवन करने वाली सामग्रियों की कीमत बढ़ी
बिलासपुर। तिखुर तो ठीक लेकिन सिंघाड़ा और सिंघाड़ा आटा की खरीदी पसीने छुड़ा सकती है। इसलिए साबूदाना को लेकर रुझान बढ़ता नजर आता है क्योंकि कीमत, क्रय शक्ति के भीतर ही मानी जा रही है।
तीज के साथ उपवास के दिन चालू हो रहे हैं। गणेश उत्सव में तो कम लेकिन नवरात्रि में ऐसी खाद्य सामग्रियां खूब मांग में रहतींं हैं, जिनका सेवन उपवास के दिनों में किया जाता है लेकिन सिंघाड़ा जैसी सामग्री के लिए व्रती को अपेक्षाकृत ज्यादा व्यय भार उठाना होगा। 

तेवर तीखे सिंघाड़ा के
फसल तैयार होने के दौरान कच्चे सिंघाड़ा में खूब मांग निकली। कीमत भी बेहतर मिली लेकिन खामियाजा उपवास पर रहने वालों को उठाना पड़ रहा है, बढ़ी कीमत में खरीदी के लिए। मांग के दिन चालू हो चुके हैं। इसलिए होलसेल बाजार में सिंघाड़ा 120 से 140 रुपए किलो में खरीदी हो रही है। चिल्हर बाजार 160 से 170 रुपए किलो पर मजबूत है। सिंघाड़ा आटा में भाव 200 रुपए किलो पर स्थिर है। 
शांत साबूदाना और तीखुर
उपवास के दिनों में साबूदाना और तीखुर से बनी सामग्रियों का भी सेवन किया जाता है। मांग के अनुरूप उपलब्धता से यह दोनों भी खरीदे जा रहे हैं। 90 से 100 रुपए किलो पर साबूदाना और 75 से 110 रुपए किलो की कीमत के बाद तिखुर की मांग में हल्की बढ़त देखी जा रही है क्योंकि कीमत क्रय शक्ति के भीतर ही है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्र की उपभोक्ता इनकी खरीदी कर रहे हैं। 
दिन आए मांग के
तीज पर्व। बाद के दिनों में गणेश उत्सव और नवरात्रि। अंत में दीपावली। यह दिन उपवास के माने जाते हैं। यानी कारोबार का सही अवसर लेकिन व्यापक तैयारी के बीच आई तेजी से उठते बाजार को आंशिक झटका लगना बताया जा रहा है। उपाय है नहीं इसलिए उम्मीद है कि तीज पर्व की कमजोर मांग की भरपाई नवरात्रि पर निकलने की संभावित खरीदी से की जा सकेगी।
