अंतिम संस्कार करने सम्मानजनक रास्ता देने में भी नाकाम सरकार और सिस्टम
अकलतरा।दल्हा पोड़ी गाँव के इस रास्तें की फाइल भी जिम्मेदार अफसरों और उनकी व्यवस्था में “अछूत” है। ये सच नहीं होता तो अपने आत्मीय जन के मृत पार्थिव देह को लेकर सड़क पर बैठने मजबूर होना पड़ता क्या ? उसे तो राम नाम सत्य है …. के उद्घघोष करते दुखी मन से कंधे पर उठाकर पंचतत्व में विलीन कर बैकुंठधाम की यात्रा के लिए विदा करने श्मशान लेकर जाते। श्मशान तक पक्की सड़क बनाकर सम्मान जनक विदाई का हक देने में सरकार 77 साल बाद भी नाकाम है। इस नाकामी का सेहरा उनके सिर फर भी जो कब्रिस्तान और श्मशान की बात करते हैं । सम्मान है … समानता है न साहब …. उस किताब में, जिसे लोग संविधान कहते हैं, जो अब भी टंगा है ताक पर … और यहां सिस्टम में सड़क की फाइल भी अछूत है …!wp-1725212767744.mov छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा ब्लॉक का गाँव है दल्हा पोड़ी। इस गांव की अंचल में पहचान है ऊंची चोटी वाली दलहा पहाड़ और यहाँ नागपंचमी पर लगने वाला भव्य मेला। इसी गाँव में एक पक्की सड़क की वर्षों पुरानी मांग है। जो बारिश के दिनों में लोगों को अपने मृत आत्मीय जन के पार्थिव देह को सम्मान पूर्वक विदाई का हक दिलाएगा। जिसकी फाइल जिम्मेदार अफसरों और सिस्टम के लिए अछूत है। प्रशासन और सरकार की इस नाकामी पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा । शनिवार 31 अगस्त को गाँव में एक महिला की मौत हो गई। गाँव वालों के समय विकट समस्या खड़ी हो गई कि मुक्तिधाम तक पहुँचने के लिए तो रास्ता ही नहीं है । रास्ते में पड़ने वाले खेतों में पानी भरा है। फसल लगी है, कई जगह तो जमीन दलदली कीचड़ से भरी हैं। मुक्तिधाम पहुंचने के जमीनी हालात और बार बार गुहार के बाद भी अफसरों की उदासीनता ने ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया। इस बार गाँववालों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरु कर दिया। श्मशान घाट तक सड़क निर्माण की माँग करने लगे। गांव में सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन करने की सूचना पर जिला प्रशासन ने तीन घंटे बाद अलकतरा तहसीलदार को मौक़े पर भेजा। उन्होंने गाँववालों से चर्चा कर मामले की गंभीरता को समझा। गौठान के पास मुक्तिधाम बनाने का आश्वासन देकर किसी तरह मामला शांत कराया। तहसीलदार से मिले आश्वासन पर भरोसा कर ग्रामीणों ने महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया।