दलहन को खरीदी का सपोर्ट नहीं, फिर भी धारणा मजबूती की



बिलासपुर।  है विकल्प हमारे पास भी, महंगी दाल की खरीदी से दूर रहने का। उपभोक्ताओं में यह सोच बनने के बाद दलहन बाजार पहली बार कमजोर हो चुकी मांग से रूबरू हो रहा है। कीमत भले ही स्थिरता की राह पर हो लेकिन मंदी की धारणा नहीं है।

दलहन बाजार वैसे भी पूरे साल चर्चा में रहता है लेकिन पहली बार यह क्षेत्र इसलिए चर्चा के घेरे में है क्योंकि उठाव की प्रतीक्षा, खत्म होने की नाम नहीं ले रही है। ऐसे में ठहरी हुई कीमत में आंशिक मंदी लाकर गिरती मांग को थामने की कोशिश है लेकिन सफलता इसलिए नहीं मिल रही है क्योंकि इस कोशिश को खरीदी का सपोर्ट नहीं है।

है विकल्प हमारे पास भी

दलहन की कीमत क्रय शक्ति से बाहर मानी जा चुकी है। कुछ समय पहले तक अरहर दाल में खंडा की खरीदी करते रहे उपभोक्ता लेकिन अब यह भी 90 से 125 रुपए किलो की ऊंचाई पर पहुंचा हुआ है। इसलिए इसकी भी खरीदी से दूरी बना रहे उपभोक्ताओं ने, खरीदी की मात्रा कम करना चालू कर दिया है। सामान्य दाल की खरीदी वैसे भी कम है। ऐसे में खंडा को लेकर नया बदलाव दलहन बाजार को हैरत में डाल रहा है।

दूसरा विकल्प यह भी

टमाटर सहित ऐसी अन्य सब्जी प्रजातियों की भी कीमत कम ही है, जो महंगी दाल का बेहतर विकल्प मानी जाती है। लिहाजा उपभोक्ताओं का एक बड़ा वर्ग महंगी दाल की खरीदी से दूर होकर मांग की दिशा बदल रहा है। यह भी दलहन की कमजोर हो चली मांग की बड़ी वजह मानी जा रही है। लेकिन एकदम से आया यह नया बदलाव भी बाजार को हताश कर रहा है।

फिर भी मजबूत

विकल्पों पर जिस तरह का उपयोग उपभोक्ता कर रहे हैं, उससे मांग कमजोर हुई है। इसके बावजूद अरहर दाल कोरा पटका अभी 165 रुपए किलो बोली जा रही है। सामान्य अरहर दाल 150 से 155 रुपए किलो पर मजबूत है जबकि खंडा 90 से 125 रुपए जैसी कीमत पर स्थिर है। चना दाल 76 से 77 रुपए, मसूर दाल 75 से 76 रुपए, मटर दाल 52 से 54 रुपए और बटरी की दाल 80 से 81 रुपए किलो बताई जा रही है। मूंग और उड़द की धुली दाल क्रमशः 108 से 111 रुपए और 117 से 121 रुपए किलो पर मजबूत है।

By MIG