प्रतीक्षा ग्रीष्मकालीन मांग की


भाटापारा। चार माह से शांत, बारदाना में अब मांग निकलने की संकेत मिलने लगे हैं। कीमत में तेजी की संभावना इसलिए नहीं है क्योंकि अग्रिम तैयारी, भरपूर मात्रा में की गई है।

खरीफ के बाद रबी सत्र की मांग की प्रतीक्षा बहुत जल्द खत्म होने वाली है। बेहतर फसल की संभावना को ध्यान में रखते हुए बारदाना बाजार ने जो तैयारी की हुई है, उसके मुताबिक चालू रबी सत्र में ठहरी हुई कीमत पर बारदानों की खरीदी किसान कर  सकेंगे।

आस बेहतर मांग की

रबी सत्र। ग्रीष्मकालीन धान के साथ गेहूं और दलहन, तिलहन फसलों के लिए जाना जाता है। अवसर देता है यह सत्र, बारदानों के बाजार को। खरीफ की अपेक्षा मांग कम ही होती है लेकिन भंडारण जैसी स्थितियां बारदानों की मांग को मजबूत आधार देती है। इसलिए सेकंड हैंड जुट बैग मार्केट अच्छा अवसर इसलिए मान रहा है क्योंकि लगभग सभी फसलें उत्पादन में बढ़त का स्पष्ट संकेत दे रहीं हैं।

संपर्क बढ़ा रहे

शहर में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या अच्छी-खासी है। यहां से सेकंड हैंड बारदानों की मांग लगभग पूरे साल निकलती रहती है लेकिन पड़ोसी बिलासपुर जिले की मांग हमेशा से प्राथमिकता में रही है। इसलिए यह कारोबार  क्षेत्र, रबी सत्र की मांग के लिए बिलासपुर जिले के संपर्क में है ताकि 3 माह से ठहरे बाजार को गति मिल सके। इसके अलावा अन्य जिलों से भी संपर्क बढ़ाने  के प्रयास हैं।

16 से 20 रुपए

20 रु प्रति नग। यह दर उस बारदानें का है, जिसका उपयोग एक बार हो चुका है। कारोबारी मांग में इसे फ्रेश बारदाना के नाम से पहचाना जाता है। जबकि 16 और 18 रुपए उस बारदानें की कीमत बताई जा रही है। जिसका उपयोग क्रमश: दो और तीन बार हो चुका है। शक्कर, सूजी, मैदा और आटा के प्लास्टिक बैग भी खरीदे जाते हैं। इसकी कीमत 9 से 10 रुपए प्रति नग पर स्थिर है। तेजी की धारणा नहीं है क्योंकि बारदानों की उपलब्धता भरपूर मात्रा में है।

By MIG