बटरी और तिवरा भी छू रहे आसमान
भाटापारा। 11000 पार। 12000 के करीब पहुंच रही है अरहर। हैरत तब और भी बढ़ जाती है, जब बटरी की खरीदी 5800 से 5900 रुपए क्विंटल पर होती देखी जाती है। बिना रुकावट तेजी का यह सिलसिला दलहन में लंबी अवधि तक बने रहने की आशंका है क्योंकि मांग के अनुपात में आपूर्ति लगभग आधी ही है।
दलहन उपभोक्ता कम से कम इस बरस तो दलहन की खरीदी में राहत की उम्मीद ना ही करें। छत्तीसगढ़ के दलहन किसानों को भले ही मौसम का साथ नहीं मिला लेकिन कर्नाटक, महाराष्ट्र को पूरा साथ मिला। भरपूर फसल भी होने की खबर आ रही हैं, साथ ही नई फसल की आवक भी बढ़ने लगी है लेकिन उपभोक्ता मांग, आपूर्ति की तुलना में महज आधी ही बताई जा रही है। ऐसे में कीमत रोज बढ़ रही है।

पहली बार 11 हजार
दो माह पहले से ही दलहन में तेजी की धारणा जताई जा रही थी। खासकर अरहर, बटरी और तिवरा में। अब जो कीमत, बोली जा रही है, वह प्रमाण है धारणा का। अरहर में 11 000 हजार रुपए क्विंटल की जो कीमत बोली जा रही है उसमें और बढ़त की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं दलहन के कारोबारी। कब कम होगी कीमत? जैसे सवाल के जवाब देने के लिए फिलहाल कोई तैयार नहीं है क्योंकि आवक की तुलना में मांग लगभग दोगुनी है।

चना से आगे बटरी
बेसन। जरूरी माना जाता है चना को लेकिन बेसन के बाजार में जिस तेजी से बटरी और तिवरा ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, वह हैरत में डाल रही है इकाइयों को। ऐसे में प्रतिस्पर्धी खरीदी से बटरी 5800 से 5900 रुपए क्विंटल और तिवरा 4400 से 4500 रुपए क्विंटल की ऊंचाई पर पहुंचा हुआ है। जबकि 5700 से 5800 रुपए क्विंटल पर चना स्थिर है। खरीदी को लेकर रुझान संकेत दे रहा है कि बटरी और तिवरा में गर्मी बनी रहेगी।

स्थिर, फिर भी गर्म
मसूर में आवक कमजोर है। मांग भी ठहरी हुई है। इसके बावजूद यह 5000 से 5500 रूपए क्विंटल पर मजबूत है। मूंग में घरेलू मांग का दबाव महसूस किया जा रहा है। इसलिए यह 8000 से 8500 रुपए क्विंटल और उड़द में कीमत 7000 से 7500 रुपए क्विंटल बोली जा रही है। स्थिरता के बावजूद यह भाव तेज माना जा रहा है।
