अरहर ने पकड़ी रॉकेट की रफ्तार



भाटापारा। 800 रुपए की छलांग लगाकर अरहर ने 10 हजार 800 की नई कीमत अपने नाम कर ली। पुष्पन की अवधि में प्रतिकूल मौसम ने जैसा कहर ढाया, उसका परिणाम, तेजी के रूप में प्रांगण में दस्तक देने लगा है।

और बढ़ेगी कीमत, दलहन की सभी किस्मों में। ऐसा इसलिए  माना जा रहा है क्योंकि लोकल फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है प्रतिकूल मौसम ने। मांग के दिन हैं, इसलिए दलहन प्रसंस्करण इकाइयां प्रतिस्पर्धी माहौल में खरीदी कर रहीं हैं। ऐसे में तेजी, लंबी अवधि तक बने रहने के प्रबल आसार हैं।

मांग ज्यादा, आपूर्ति कम

दाल मिलों की रोजाना की जरूरतें वैसे तो कर्नाटक से  पूरी की जाती है लेकिन स्थानीय फसल के दिन हैं, इसलिए इकाइयां बेमेतरा, दुर्ग और मुंगेली जिले से हो रही आवक की खरीदी कर रहीं हैं। बेहद कमजोर मानी जा रही अरहर की आवक से  प्रतिस्पर्धी खरीदी जैसी स्थितियां बन चुकी हैं। इसलिए बीते सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिवस पर 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल पर बिकने वाली अरहर 10 हजार 800 क्विंटल पर पहुंच गई।

मिजाज यह भी बदल रहे

दो दिवस पहले ही 5500 रुपए क्विंटल पर खरीदा गया था चना को। इसने 200 रुपए की छलांग लगा ली है। 5700 रुपए क्विंटल की नई कीमत के बाद रुझान, अब बटरी की खरीदी की ओर बढ़ने लगी है। ऐसे में 5000 रुपए पर चल रही बटरी 5300 रुपए पर पहुंच गई है। तिवरा भला क्यों पीछे रहता ? इसने भी अपनी कीमत 4200 रुपए कर दी है। इसके पहले तक यही तिवरा 4000 रुपए क्विंटल पर उपलब्ध हो रहा था।

बरकरार रहेगी तेजी

कमजोर फसल। चौतरफा मांग और बारिश के दिनों के लिए तैयारी। यह तीन ऐसी स्थितियां हैं, जिसने दलहन की सभी किस्मों में दीर्घकाल तक तेजी की संभावना को मजबूती दी हुई है। यानी उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में भी ऊंची कीमत पर दाल खरीदनी होगी। खासकर अरहर में तो ऐसा होना तय माना जा रहा है। और हां, असर पशु आहार पर भी देखा जाएगा क्योंकि हरा चारा है नहीं, और मवेशी पालक जरूरी आहार के लिए इस वक्त बाजार पर ही निर्भर हैं।

By MIG