यूनिटों का संचालन हुआ कठिन

भाटापारा। 10 हजार 200 रुपए क्विंटल। पहले से ही संकट में चल रही दाल मिलों के लिए अरहर की यह नई कीमत, तगड़ा झटका मानी जा रही है। आसार आगे भी तेजी के ही बने हुए हैं।

सीजन है लेकिन अपेक्षित मांग नहीं है क्योंकि दलहन की लगभग सभी प्रजातियों की कीमत क्रय शक्ति से बाहर हो चलीं हैं। खासकर अरहर में आ रही अनवरत तेजी से ईकाइयां भी संकट में आ चुकीं हैं। ताजा बढ़ोतरी को हतोत्साहित करने वाला इसलिए माना जा रहा है क्योंकि बोली जा रही कीमत पर खरीद के बाद तैयार दाल के लिए उपभोक्ता मांग में तेजी से गिरावट आने की प्रबल आशंका है।

इसलिए तेजी

घरेलू और आयातित फसल में 80 फ़ीसदी मात्रा की खरीदी बड़ी कंपनियां और स्टॉकिस्ट कर रहे हैं। बची हुई 20 फ़ीसद मात्रा से घरेलू ईकाइयों की जरूरतें पूरी नहीं हो रही है। लिहाजा ऊंची कीमत देकर बड़ी कंपनियों से खरीदी करनी पड़ रही है। असर होलसेल से लेकर रिटेल काउंटर तक बढ़ती कीमत के रूप में देखा जा रहा है।

सांसत में लघु ईकाइयां

नियमित संचालन और बाजार की मांग व आपूर्ति को संतुलन में रखतीं हैं दाल प्रसंस्करण ईकाइयां। सांसत का सामना यही क्षेत्र कर रहा है क्योंकि कंपनियों और स्टॉकिस्टों से खरीदी महंगी पड़ रह है । यह इकाइयां कम दर पर उपलब्धता के लिए कृषि उपज मंडियां पहुंच तो रहीं हैं लेकिन यहां भी उनका सामना हैरत में डालने वाली तेजी से हो रहा है।

इस भाव पर अरहर

कंपनियों और स्टॉकिस्टों से जो अरहर खरीदी जा रहीं हैं उसकी प्रति क्विंटल कीमत 11 हजार 200 रुपए बताई जा रही है, तो कृषि उपज मंडी में इसकी खरीदी 10 हजार 200 रुपए क्विंटल पर करनी पड़ रही है। सीजन के दिन हैं, खुदरा बाजार में महीने की ग्राहकी है, इसलिए यह तेज भाव भी स्वीकार की जा रही है।

सभी किस्में गर्म

मंडी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अरहर 10 हजार 200 रुपए, उड़द 6800 रुपए, मूंग 6500 से 6600 रुपए, चना 4800 रुपए, मटर 4500 रुपए, बटरी 4100 रुपए और तिवरा 3500 से 3600 रुपए क्विंटल पर मजबूती से जमा हुआ है।

अस्तित्व पर संकट

दलहन में अरहर की तेजी से संचालन में बेहद कठिनाई आ रही है। लघु और मध्यम दर्जे की मिलों के सामने अस्तित्व बचाए रखने की चुनौती है।
– नरेश आर्य, अध्यक्ष, दाल मिल एसोसिएशन,भाटापारा