बढ़ाना होगा ओवन या गैस चूल्हा का उपयोग…!
होटल-ढाबों में चलेगा जागरूकता अभियान
बिलासपुर। खराब हो सकती है चूल्हा या भट्ठियों में बन रही खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता। इसलिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जागरूकता अभियान की तैयारी चालू कर दी है।
पर्यावरण सुधार की दिशा में होते काम के बीच ऐसे होटल और ढाबे भी नजर में आ रहे हैं, जो खुले में कोयला या लकड़ी से चूल्हे व भट्ठियां जला रहे हैं। पड़ोसी मध्य प्रदेश में हुई कार्रवाई के बाद अब अपने छत्तीसगढ़ में भी जागरूकता अभियान की योजना बनने के संकेत मिल रहे हैं। यह काम सबसे पहले उस खाद्य एवं औषधि प्रशासन के द्वारा की जाएगी जिस पर खाद्य एवं पेय पदार्थो की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी है।
इसलिए अभियान
चूल्हा या भट्ठियों में बनाई जा रही खाद्य सामग्री की गुणवत्ता इसलिए खराब हो सकती है क्योंकि कोयला और लकड़ियों के जलने से निकलने वाली राख के कण, हवा के साथ खाद्य सामग्री में पहुंचने की आशंका रहती है। सेहत के लिए नुकसानदेह इसलिए भी हो सकती है क्योंकि संस्थानें यह सामग्रियां खुले में ही रखतीं हैं। लिहाजा जांच के पहले जागरूकता अभियान चलाने की योजना है।
बताए जाएंगे विकल्प
जागरूकता अभियान में खाद्य सामग्री बनाने वाली संस्थानों को कोयला या लकड़ी की भट्टी की बजाय इलेक्ट्रिक ओवन और गैस चूल्हा का उपयोग बढ़ाने के उपाय सुझाए जाएंगे। यह दोनों विकल्प पर्यावरण को बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा धुआं और उड़ती राख जैसी समस्या भी नहीं आएगी। खाद्य सामग्री भी सुरक्षित रखी जा सकेगी।
पहले अभियान, फिर जांच
जागरूकता अभियान के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जांच अभियान शुरू करने के संकेत दिए हैं। शुरुआती जांच में अधिकांश संस्थानों के सामने ही चूल्हे या भट्ठियों में काम होता पाया गया है। इनसे निकलने वाला धुआं और उड़ने वाली राख राहगीर और नाश्ता कर रहे उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है। यह गंभीर हो सकता है सेहत के लिए।
देंगे समझाइश
कोयला और लकड़ी से चलने वाली भट्ठियों से निकलने वाला धुआं और राख के कण सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए खाद्य सामग्री बनाने और बेचने वाली संस्थानों के लिए जागरूकता अभियान की तैयारी है।
– डॉ. आर के शुक्ला, डिप्टी कमिश्नर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, रायपुर
