बीज बाजार में पहुंची मांग



भाटापारा। सीजन नहीं, पूरे साल मांग में रहने लगी है प्याज भाजी। लिहाजा उद्यानिकी फसलों में अपने यहां इसे प्राथमिकता के साथ जगह मिल रही है। कुछ ऐसा ही हाल लहसुन का भी है जिसमें बोनी का रकबा आहिस्ता- आहिस्ता बढ़त लेता नजर आता है।

एक समय ऐसा भी था, जब केवल शीत ऋतु के दिनों में ही प्याज और लहसुन भाजी मिला करती थी लेकिन मांग के दिनों में बेहद सीमित उपलब्धता की वजह से ना केवल खेती का रकबा बढ़ा बल्कि नई प्रजातियों ने खेतों से होकर बाजार में पहुंच बनाई। इससे उन किसानों को सबसे ज्यादा लाभ मिला, जो ऑफ सीजन उद्यानिकी फसल लेते हैं। बीज की दर वैसे तो अधिक है लेकिन फसल को भी कीमत बेहतर मिल रही है।

इसलिए हाइब्रिड

तैयार होने में समय का कम लगना। इसलिए प्याज में हाइब्रिड बीज की मांग का दबाव बना हुआ है। भरपूर उत्पादन देने वाली प्रजातियां भी मांग में हैं लेकिन हाइब्रिड में खरीदी को लेकर रुझान बढ़ा हुआ है। समय है बोनी का, इसलिए हाइब्रिड प्याज का बीज 500 से 1800 रुपए किलो पर खरीदा जा रहा है जबकि देसी प्रजाति के बीज की खरीदी 500 से 800 रुपए किलो में की जा रही है।

सस्ता है लहसुन बीज

प्याज के समानांतर बिकने वाले लहसुन बीज में भी अच्छी मांग निकली हुई है। इसलिए सब्जी उत्पादक किसान लहसुन बीज की खरीदी कर रहे हैं। बाजार सूत्रों के मुताबिक इसमें हाइब्रिड सीड की उपलब्धता नहीं है। इसलिए देसी प्रजाति के बीज महज 100 से 200 रुपए किलो की दर पर मिल रहे हैं। दिक्कत केवल तैयार फसल को अपेक्षित ग्राहकी नहीं मिलने की वजह से आ रही है।

उपभोक्ता मांग जोरदार

होटल, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड सेंटर के साथ चाट कार्नरों में भी प्याज और लहसुन की मांग अच्छी निकली हुई है। इसलिए डिमांड का लेबल बना हुआ है। इसके अलावा घरेलू मांग में भी इजाफा देखा जा रहा है। इसलिए सब्जी उत्पादक किसानों में बीज की खरीदी को लेकर रुझान बढ़ता नजर आ रहा है।है

प्याज, लहसुन बीज की कीमत में खास वृद्धि नहीं हुई है। मांग और आपूर्ति के अनुसार मिल रहे यह दोनों, पूरे साल उद्यानिकी फसलों में अपनी जगह बना रहे हैं।
– कमल वर्मा, वर्मा बीज भंडार, भाटापारा