खाद्य और पेय पदार्थों की पैकिंग में ‘प्योर’ सहित पांच शब्दों के उपयोग पर प्रतिबंध

बलौदा बाजार। मान्य नहीं होगा खाद्य पदार्थ की पैकिंग में ‘शुद्ध’ शब्द का अंकित होना। ओरिजनल या प्योर शब्द भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे। त्यौहार पूर्व सघन जांच अभियान की तैयारी कर रहे खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कहा है कि इसे भ्रामक प्रचार की श्रेणी के तहत माना जाकर कार्रवाई की जाएगी।

दीप पर्व के लिए अब बहुत ज्यादा दिन नहीं रह गए हैं। खाद्य सामग्री बेचने वाली संस्थानों ने तैयारी चालू कर दी है लेकिन इस बार खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कुछ ऐसे प्रावधानों के तहत जांच करने की तैयारी शुरू कर दी है जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा है। जांच के दौरान पैकेजिंग और लेबलिंग विनियम-2011 भी महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। इसमें कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका उपयोग किया जाना प्रतिबंधित है।

मान्य नहीं यह शब्द

शुद्ध या प्योर। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी पैकेज के लेबल पर जिसमें खाद्य की अनुकृति है उस पर शुद्ध या उसी महत्व का अन्य शब्द का अंकित किया जाना स्वीकार नहीं होगा। विशेषता स्पष्ट करने वाले उत्पादन में औषधीय दावा करने वाले शब्द मान्य नहीं होंगे। फायदा या लाभदायक दर्शाने वाला दावा नहीं किया जा सकेगा। इसी तरह प्योर या ओरिजनल जैसे शब्दों का किया जाना भी प्रतिबंध की श्रेणी में लिया गया है। बेस्ट क्वालिटी जैसे शब्द भी भ्रामक प्रचार की श्रेणी में लिए जाएंगे।

तो यह भी नहीं

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2011 के अनुसार ऐसे किसी फल सिरप, फल रस, फल स्क्वैश, फल पेय कार्डियल या क्रश की पैकिंग में संबंधित फल गूदा या अंश की मात्रा का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। यदि यह मात्रा अंकित नहीं मिली तो उसे फल सिरप, फल रस, फल स्क्वेश, फल पेय, कार्डियल या क्रश नही माना जाएगा।

पेयजल की पैकिंग के लिए

पेयजल की पैकिंग में विशेषताओं से संबंधित औषधीय दावा नहीं किया जा सकेगा। मसलन निवारक, उपशमक या आरोग्यकारी और उपभोक्ता के लिए सेहतमंद या लाभदायक जैसे शब्द भ्रामक प्रचार की श्रेणी में आएंगे। ऐसी तस्वीर, जिससे जल की प्रकृति, उद्गम, संयोजन भी मान्य नहीं होंगे, जिनसे भ्रम की स्थिति बनती है। याने विक्रय के पहले कदम-कदम पर सतर्कता बेहद जरूरी होगी।

पालन अनिवार्य

खाद्य एवं पेय पदार्थों की पैकिंग के लिए जो नियम हैं उसके तहत ऐसे शब्दों का उल्लेख करना प्रतिबंधित किया गया है जो सुझाव, सलाह अथवा भ्रमित करते हैं। निर्माण इकाइयों और विक्रय करने वाली संस्थानों को इसका पालन करना होगा।उमेश वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बलौदा बाजार

उमेश वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, बलौदा बाजार