मांग ने बनाया कीर्तिमान
बिलासपुर। आक और धतूरा के फूल इस बार खूब बिके। धतूरा के फल ने तो डिमांड के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए। फूल बाजार के लिए शायद पहला सावन ऐसा रहा कि फूलों की यह दोनों प्रजातियां मांग में निरंतर बनी रहीं। कनेर, गुलाब, गुड़हल और कमल के फूल भी डिमांड में बने रहे लेकिन जैसा प्रतिसाद धतूरा, आंक और बेल पत्तियों को मिला, वह फूल बाजार के लिए हैरत में डालने वाला माना जा रहा है।
महामारी के दो बरस के बाद सामान्य होती दिनचर्या के बीच चल रहा सावन का महीना फूल बाजार के लिए बेहतरीन माना जा रहा है। अंतिम सोमवार ने तो खरीदी और बिक्री के नए कीर्तिमान बना लिए। सावन का महीना पूरा होने में अभी 4 दिन शेष हैं। इसलिए मानकर चला जा रहा है कि कोरोना के दौर में हुए नुकसान की भरपाई ना केवल पूरी कर ली जाएगी बल्कि जो कीर्तिमान बनाया है वह शायद ही कभी टूट पाए।

आक और धतूरा के फूल
पुराणों में आक और धतूरा के फूलों का अर्पण बेहद शुभ माना गया है। सावन के महीने में फूलों की यह दोनों प्रजातियां वैसे भी मांग में रहतीं हैं लेकिन इस बार जैसी मांग निकली हुई है, उसने पहली बार कीर्तिमान बना लिया। सावन के चलते महीने में हर दिन इसकी मांग बनी रही। यह इतनी ज्यादा रही कि सोमवार के लिए व्यवस्था में बाजार के पसीने छूट गए।

धतूरा का फल भी खूब
सड़क किनारे, खेत और खलिहान में अपने आप तैयार होने वाले धतूरा के पौधे को इस बार मौसम का खूब साथ मिला। पुष्पन की संख्या तो बढ़ी,साथ ही फल भी अपेक्षाकृत ज्यादा लगे। महीना है सावन का, इसलिए भक्तों को इसके लिए भटकना नहीं पड़ा। फूल बाजार ने स्थिति को देखते हुए तैयारी पहले से कर रखी थी, इसलिए उपलब्धता आसान बनी रही। हैरत इसलिए रही क्योंकि पहली बार मांग दोगुनी रही।

भरपूर, इसलिए आसान
धतूरा के फूल और फल। आक के फूल। बिल्व पत्र। यह चार ऐसी जरूरी सामग्री रहीं, जिसकी भरपूर उपलब्धता ने कीमत को काबू में रखा हुआ है। फूल जहां एक से दो रुपए में बिक रहे हैं, वहीं फल की कीमत भी इसी के आसपास चल रही है। बिल्व पत्र में 51 और 101 के पैकेट की व्यवस्था के लिए भक्तों को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ी।शार्टेज की स्थिति तो नहीं है लेकिन कमी के समय में भी कीमत जस की तस बनी हुई है। यह 25 से 50 रुपए पर उपलब्ध है।
