कृषि महाविद्यालय बिलासपुर की उपलब्धि

 बिलासपुर। चोरभट्टी बिलासपुर स्थित राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में अपने उत्पादित जैविक उत्पाद बेच कर 15 लाख रुपए कमाएं।

जैव नियंत्रण प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य रोगों और कीटों के नियंत्रण के लिए जैविक उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन है। जैव नियंत्रण उत्पाद रोग और एकीकृत कीट प्रबंधन का एक अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा है। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के अंतर्गत चोरभट्टी बिलासपुर स्थित राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में अपने उत्पादित जैविक उत्पादों को बेंचकर 15 लाख रुपए कमाएं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल को डॉ. आर.के. एस. तिवारी, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने इसका चेक भेंट किया। इस अवसर पर डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, निदेशक अनुसंधान सेवाएं, उमेश अग्रवाल, लेखा नियंत्रक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर उपस्थित थे। कुलपति ने इस उपलब्धि पर अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय बिलासपुर, राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों व कर्मचारियों को बधाई प्रेषित किया।

2014 से हो रहा उत्पादन

राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला में अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. आर.के.एस. तिवारी के मार्गदर्शन में डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर, वैज्ञानिक, डॉ. प्रमेंद्र कुमार केसरी, वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान), तकनीकी सहायक राजेंद्र कुमार रात्रे, तुलसी मिरी व राकेश साहू की टीम द्वारा 2014 से जैविक उत्पादों का उत्पादन शुरू किया गया और तब से प्रयोगशाला ने उत्पादन क्षमता में सीमा में वृद्धि कर छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकता के अनुसार नए जैव नियंत्रण उत्पादों को जोड़ा है।