चार आना रहिगे बाजार…

भाटापारा- कैसे करें रोजी-रोटी का इंतजाम ? यह यक्ष प्रश्न मंडी श्रमिक, गाड़ीवान, हाथ ठेला और छोटी माल वाहक चलाने वाले के सामने आ खड़ा हुआ है। हताश हो चला है बाजार क्योंकि उपभोक्ता मांग में लगभग 75 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है।

कृषि उपज बेचने के पूर्व दिखानी होगी ऋण पुस्तिका। आवक पर किसानों का ब्रेक। बीते 3 दिन से खाली बैठे हैं श्रमिक। सबसे गहरा असर उन गाड़ीवानों और हाथ ठेला चलाने वाले पर देखा जा रहा है, जिनकी रोजी-रोटी का इंतजाम प्रांगण पहुंचने वाली कृषि उपज के दम पर ही होता है।

कैसे मिटाएंगे भूख

महिला और पुरुष श्रमिकों के साथ अनलोडिंग, कटाई, पाला करने, तौलाई और सिलाई करने के बाद लोडिंग करने वाले श्रमिकों की संख्या लगभग 2000 से 2500 के करीब है। यह सभी बीते दो दिवस से खाली बैठे हैं। यह इसलिए क्योंकि ऋण पुस्तिका के अनिवार्यता की शर्त ने किसानों को आवक से दूर रखा हुआ है। प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच सिर्फ एक सवाल – कैसे मिटाएंगे भूख ?

सन्नाटा बाहर तक

किराना, होटल, बारदाना, कृषि दवा और उर्वरक विक्रय करने वालों के साथ भवन निर्माण सामग्री बेचने वाली संस्थानों में भी ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता का असर कमजोर ग्राहकी के रूप में देखा जा रहा है। लगभग खाली गुजर गया बीता दो दिवस। यहीं पर खडी़ छोटी दूरी तय करने के लिए परिवहन सेवाएं देने वाली छोटी मालवाहक वाहनों के पहिए भी थम चुके हैं। रोजी-रोटी की चिंता इन सभी को सता रही है।

75 फ़ीसदी घटा बाजार

जीवन रेखा मानी जाती है कृषि उपज मंडी को बाजार के लिए। पहली बार आई इस स्थिति के बाद उपभोक्ता मांग में लगभग 75 फीसदी की गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है। समय रहते समस्या के निदान के उपाय नहीं किए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती क्योंकि नगदी प्रवाह तेजी से कम हो रहा है। सर्वाधिक असर किराना बाजार पर पड़ रहा है।