बिलासपुर । भाजी फसलें अगले सप्ताह के अंत से राहत देने लगेंगी लेकिन टमाटर और गोभी के लिए कम से कम एक पखवाड़े और इंतजार करना होगा।
टमाटर 40 से 60 रुपए किलो। गोभी 40 से 100 रुपए किलो। सेमी 50 से आगे। भिंडी, बरबट्टी और करेला की कीमत तो क्रय शक्ति से बाहर हो चली है। हद तो यह कि कुंदरू, कुम्हड़ा, तुरई और लौकी तक के दाम आसमान छू रहे हैं।
बाहर की आवक कमजोर

सब्जियों की अधिकांश प्रजातियां फिलहाल स्थानीय ही हैं क्योंकि पड़ोसी राज्यों की फसलों पर देश स्तर पर मांग का दबाव बना हुआ है। ऐसे में प्रतिस्पर्धी खरीदी से भाव आसमान छू रहे हैं। यह स्थिति दिसंबर मध्य तक बनी रहने की संभावना है। इसलिए इस अवधि में घरेलू सब्जी बाड़ियों पर ही निर्भर रहना होगा। जहां दूसरी फसल तैयार हो रहीं हैं।
राहत एक सप्ताह बाद
पालक, मेथी, लाल, अमारी और प्याज भाजी सहित अन्य भाजी फसलें 50 रुपए किलो से 200 रुपए किलो तक पहुंची हुई है। जिन में उतार की संभावना अगले सप्ताह के बाद ही व्यक्त की जा रही है क्योंकि व्यावसायिक सब्जी बाड़ियों में भाजी फसलें परिपक्वता अवधि में प्रवेश कर रहीं हैं। तब तक चल रही तेजी के बीच ही खरीदी करनी होगी भाजी फसलों की।

मध्य दिसंबर में आएंगी
गोभी 40 से 100 रुपए किलो। बरबट्टी 70 से 80 रुपए किलो। भिंडी और करेला 80 रुपए किलो। अन्य सभी सब्जियां भी इन्हीं दर के करीब हैं। इनकी नई फसल मध्य दिसंबर तक आने की धारणा है। कुम्हड़ा, तुरई और लौकी आ तो रहीं हैं लेकिन कम मांग में रहने वाली यह तीनों भी 40 से 50 रुपए किलो पर चल रहीं हैं।
इसलिए भी तेजी
खाद, बीज की कीमत लगातार बढ़त लिए हुए हैं। प्रतिकूल मौसम की वजह से कीट प्रकोप की शिकायतें भी बढ़ी हुई हैं। ऐसे में सब्जी की खेती में लागत व्यय हर साल बढ़ रहा है। यह सब कारक मिलकर तैयार सब्जी फसल की कीमत को बढ़ाए हुए हैं। सामान्य होने में कम से कम एक पखवाड़े का समय और लगने की धारणा है क्योंकि स्थानीय के साथ- साथ पड़ोसी राज्यों से भी आवक बढ़ेगी।

प्रतिकूल मौसम की वजह से सब्जी फसलों को बेहद नुकसान पहुंचा है। भाजी फसलों की कीमत एक सप्ताह बाद उतरने की संभावना है जबकि गोभी सहित अन्य फसलें दिसंबर मध्य तक सस्ती होंगी क्योंकि यह परिपक्वता अवधि में प्रवेश कर रहीं है।
- डाॅ.अमित दीक्षित, डीन, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय व अनुसंधान केंद्र, सांकरा, दुर्ग
