बिलासपुर। खतरे में है चरोटा। पुष्पन के दौर में मौसम का मिजाज जिस तरह बिगड़ा हुआ है, उससे भाव में प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपए की तेजी आ चुकी है।
धान ही नहीं, तैयार होते वनोपज भी संकट के घेरे में आ चुके हैं। सर्वाधिक खतरा उस चरोटा पर है, जो फिलहाल पुष्पन के दौर से गुजर रहा है। इससे उत्पादन में लगभग 20 से 25 प्रतिशत गिरावट की आशंका है।

गर्म होने लगा
मौसम का मिजाज और संग्रहण क्षेत्र से आ रही कमजोर फसल की खबर के बाद चरोटा में स्थानीय खरीदी चालू हो चुकी है। इससे माह भर पहले तक 2200 रुपए क्विंटल पर चल रहा चरोटा अब 2500 रुपए क्विंटल पर पहुंच चुका है। संभावना 2700 रुपए क्विंटल तक जाने की बन रही है क्योंकि खुले बाजार में मांग के अनुरूप आवक नहीं है। भंडारित उपज भी शून्य की स्थिति में है।

संकट ऐसे बढ़ रहा
बीते एक पखवाड़े से मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच लग रहे फूल, गिरने की अवस्था में आ चुके हैं। इससे नई फल्लियां नहीं लग पाएंगी। यह कमजोर उत्पादन के रूप में देखा जाएगा। निर्यात की राह भले ही बंद है लेकिन संभावना के बीच स्थानीय खरीदी चालू हो चुकी है। मालूम हो कि प्रदेश में गरियाबंद, धमतरी, राजिम और सरगुजा के साथ जशपुर जिले में व्यापक खरीदी होती है।

प्रतीक्षा निर्यात की
चीन, जापान, ताइवान और मलेशिया। प्रमुख खरीददार देश है छत्तीसगढ़ के चरोटा के लेकिन इन देशों ने बीते 1 साल से खरीदी बंद रखी हुई है। लिहाजा वनोपज कारोबारी अपनी तरफ से हर मुमकिन प्रयास कर रहे हैं निर्यात की। मालूम हो कि छत्तीसगढ़ के चरोटा से यह उपभोक्ता देश चाय और काफी जैसे पेय बनाते हैं।

घटेगा उत्पादन
मौसम का मूड जैसा बना हुआ है, उससे चरोटा के फूल गिरने लगे हैं। इससे फल्लियां कम लगने की आशंका है। यह स्थिति सीधे-सीधे उत्पादन पर असर डालेगी।
- सुभाष अग्रवाल, एस पी इंडस्ट्रीज, रायपुर
