बिलासपुर। तैयारी त्यौहार की। तेवर तेज होने लगे हैं तिलहन के लेकिन 9500 से 9700 रुपए क्विंटल जैसी कीमत पर पहुंचकर मूंगफली दानों ने पैक्ड नमकीन निर्माता इकाइयों की परेशानी बढ़ा दी है क्योंकि इसमें तेजी के आसार अभी भी बने हुए हैं।
कमजोर उत्पादन। कमजोर आवक लेकिन भरपूर मांग। यह तीन स्थितियां त्यौहारी सीजन के शुरुआती दौर से ही तिलहन में तेजी लानी शुरू कर दी है। संकेत दीर्घकालिक तेजी के मिल रहे हैं। इसलिए ईकाइयां नई फसल की आवक तक के लिए अग्रिम खरीदी में लगी हुई हैं।

तेवर तेज मूंगफली के
खाद्य तेल नहीं, अब नमकीन बनाने वाली इकाइयां मूंगफली में बड़ी मांग क्षेत्र बन रहीं हैं। इसके अलावा स्थानीय होटल और स्ट्रीट फूड कॉर्नर भी मूंगफली के नियमित उपभोक्ता क्षेत्र बने हुए हैं। रही-सही कसर त्यौहारी सीजन के लिए निकलती मांग पूरी कर रही है। इसलिए प्रति क्विंटल कीमत 9500 से 9700 पर पहुंची हुई है। तेजी के संकेत बराबर मिल रहे हैं ।
दोतरफा दबाव सोयाबीन पर
खाद्य तेल और सोया बड़ी बनाने वाली इकाइयों का दबाव सोयाबीन की फसल पर निरंतर बना हुआ है। पूरे साल मांग में बनी रहने वाली यह दोनों सामग्रियां सोयाबीन की खेती का रकबा भले ही बढ़ा रही हैं लेकिन अनुपात में कीमत भी बराबर बढ़त लिए हुए हैं। रक्षाबंधन से शुरू हुआ त्यौहारी सीजन अब दीपावली तक बना रहेगा। इसलिए तेजी की धारणा के बीच सौदे 3500 से 4000 रुपए क्विंटल पर हो रहे हैं।

तेजी की दौड़ में यह भी
वार्निश निर्माण ईकाइयां अलसी में खरीदी करने लगी हैं। दीपावली पूर्व तैयारी की वजह से अलसी 6000 से 6500 रुपए क्विंटल पर पहुंच चुका है। पैक्ड फूड ऑयल बनाने वाली इकाइयों की मांग से सरसों 6200 से 6400 रुपए क्विंटल जैसी कीमत पर खरीदी जा रही है तो तिल में सौदे 8000 से 9000 रुपए क्विंटल पर होने की खबर है।
