रोकथाम के उपाय नहीं, मिल रहा अनुकूल माहौल
बिलासपुर। माना जाता रहा है 4 माह का कारोबार लेकिन इस बार मच्छर अगरबत्ती की जोरदार डिमांड छठवें माह में भी कम नहीं हुई है। कम होने की संभावना लगभग शून्य ही है क्योंकि मच्छरों को अनुकूल माहौल मिला हुआ है।
मच्छर अगरबत्ती के सीजन के दिनों में एक माह की वृद्धि हो चुकी है। दूसरे माह के मध्य में पहुंच चुकी यह सामग्री, इस बार बिक्री का कीर्तिमान बनाने की राह पर है। यह दोगुना से ज्यादा होने की संभावना इसलिए है क्योंकि नियंत्रण के सटीक उपाय लेकर लापरवाही अभी भी बनी हुई है।

बढ़ रहे सीजन के दिन
नवंबर से फरवरी के बीच के दिवस मच्छरों के लिए आदर्श माने जाते हैं। इस बार अक्टूबर में ही सीजन ने दस्तक दे दी। समाप्ति के दिन को गुजरे दूसरा माह होने को आया लेकिन डिमांड को देखकर संभावना बन रही है कि मच्छरों का आक्रमण जून तक बना रह सकता है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि पनपने और आबादी बढ़ाने वाली स्थितियां अब भी बनी हुई हैं।

दोगुना के करीब डिमांड
स्वच्छता अभियान तो चल रहा है लेकिन अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर गंभीरता नजर नहीं आ रही है। ऐसे में मच्छरों से बचाव के उपाय पर दोगुना खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए इस सीजन में 10 लाख रुपए का यह बाजार 20 लाख रुपए के करीब पहुंचता नजर आ रहा है। मांग को देखते हुए अग्रिम तैयारी की हुई हैं संस्थानों और ईकाइयों ने।

स्टिक सबसे आगे
तरल, टिकिया और अगरबत्ती के रूप में आते हैं मच्छरों से बचाव के उपाय। स्प्रे में भी डिमांड रहती आई है लेकिन अगरबत्ती को लेकर जैसा रुझान बना हुआ है, उसे देखते हुए देश की उपभोक्ता सामग्रियां बनाने वाली कई बड़ी कंपनियों के उत्पादन बहुत जल्द नज़र आने वाले हैं। इन सब के बावजूद मच्छरों से बचाव की राह आसान नजर नहीं आ रही है।
