बेल पत्ती, गेंदा और आंक आसमान पर
बिलासपुर। नियमित चाहिए, तो दस रूपये की ग्यारह बेलपत्तियाँ दी जा सकेंगी अन्यथा दो से तीन रुपए प्रति नग लगेंगे। धतूरा तो अनमोल हो चुका है। बेहद कमजोर उपलब्धता से पांच से दस रूपये जैसी कीमत बोली जाने लगी हैं।
सावन। शिवालयों में पहला दिन बेहद गहमा-गहमी के बीच बीता लेकिन फूल बाजार अब पूरे माह गुलज़ार रहेगा क्योंकि भक्तों की मांग, बेलपत्तियों और फूलों में निकल चुकी है। लिहाजा कुछ खास प्रजातियां तेजी के दौर में हैं। इसलिए आगत दिनों में कीमतें और भी बढ़ सकती है।

इसलिए दो से तीन रुपए
बेल पत्तियाँ। सावन में अहम मानी जाती है लेकिन प्राकृतिक रूप से तैयार होने वाले बेल के वृक्ष तेजी से बढ़ती आबादी के निशाने पर आ रहे हैं। वृक्षों की घटती संख्या से पत्तियां भी शॉर्टेज की स्थिति में आ रही हैं। यही वजह है कि फूल बाजार, पत्तियों के लिए 2 से 3 रुपए प्रति नग जैसी कीमत बता रहा है। मांग को देखते हुए उपलब्धता वाले क्षेत्र से संपर्क बढ़ाने की कोशिश तो है लेकिन सफलता दूर है।

धतूरा शार्ट
आंक के फूल तो मिल जा रहे हैं 5 से 10 रुपए जैसी कीमत के साथ भरपूर मात्रा में लेकिन धतूरा के फल की जबरदस्त शॉर्टेज है। मांग के अनुरूप महज 20 से 25 प्रतिशत उपलब्धता की वजह से यह 5 से 10 रुपए प्रति नग जैसी उच्च कीमत पर पहुंचा हुआ है। अलबत्ता कनेर के फूल इच्छित मात्रा में मिल जा रहे हैं। खरीदी 5 या 10 रुपए में की जा रही है।

गेंदा गर्म
पश्चिम बंगाल, बेंगलोर और नागपुर। गेंदा के फूलों की आवक इन शहरों से हो रही है लेकिन गाड़ियों का अनियमित परिचालन आपूर्ति की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। जबकि मांग नियमित है लेकिन समय पर आपूर्ति नहीं होने से कीमत 300 रुपए किलो पर जा पहुंची है। तेजी की धारणा इसलिए बन रही है क्योंकि आ रहे फूलों में बड़ी मात्रा खराब निकल रही है एवं गंतव्य तक पहुंचने में समय भी ज्यादा लग रहा है।
