एडवांस सौदे से इनकार

 

बिलासपुर।  खोवा बाजार इस बरस एडवांस सौदे से हाथ खींच सकता है क्योंकि बीते 3 साल से मांग लगातार घटते क्रम पर है। यही वजह है कि खोवा 200 से 240 रुपए किलो पर शांत है।

बेहद खराब दिन का सामना कर रहा है खोवा बाजार। चौथा बरस है, जब खोवा में बेहतर मांग की संभावना बनती नजर नहीं आ रही। हालांकि रक्षाबंधन से खोवा के अच्छे दिन शुरू होते रहे हैं लेकिन खरीददारी के दिन तेजी से कम हो रहे हैं। ऐसे में एडवांस सौदा नुकसान दे सकता है। इसलिए बाजार, पीछे हटने का संकेत दे रहा है।

कड़ी प्रतिस्पर्धा

मिठाइयों की हर किस्म अब पैकिंग में आने लगी है। इसने परंपरागत खोवा बाजार को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि गुझिया, पीड़िया और खाजा जैसी घरेलू मिठाइयां भी पैकिंग में आने लगी है। इससे भी खोवा बाजार को नए उपभोक्ता की तलाश में बेहद कठिनाई हो रही है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र भी पैक्ड मिठाइयों की खरीदी को प्राथमिकता देने लगा है।

सिर्फ एक दिन

रक्षाबंधन। खोवा में मांग, शुरू होने से एक सप्ताह तक चलती थी खरीदी। बाद के दिनों में थोड़ी मात्रा में खरीदी का यह क्रम, दीपावली तक चला करता था। अब ऐसा नहीं रहा। पांच फिर, तीन दिन। अब मात्र एक दिन ही खोवा में मांग रहने लगी है। इसमें और कमी की आशंका बनने लगी है। यह बदलाव खोवा बाजार के अस्तित्व को झटका देने वाला हो सकता है।

एडवांस सौदे से पीछे हट रहे

मिष्ठान्न बाजार में आया यह बदलाव खोवा में एडवांस सौदा से हाथ खींचने पर विवश हो चुका है। उत्पादक क्षेत्र की परेशानी इसी बात से समझी जा सकती है कि बीते एक माह से सफेद खोवा 220 रुपए और लाल खोवा 240 रुपए किलो पर स्थिर है। संभावना वृद्धि की जरा भी नहीं है, इसलिए ‘रुको और देखो’ जैसी नीति पर अमल कर रहा है खोवा बाजार।