भाटापारा। दबाव में है गुझिया। बारहमासी मांग में आ चुका है अईरसा। साथ ठेठरी और खुरमी का भी मिल रहा है। करीब आ रहे होली के लिए पहली बार छत्तीसगढ़ी व्यंजन की मांग में आश्चर्यजनक उछाल देखी जा रही है।
पर्व और त्यौहार विशेष में बनने वाले छत्तीसगढ़ी व्यंजन अब स्वीट कॉर्नरों में भी बनने लगे हैं लेकिन अईरसा, ठेठरी, खुरमी और गुझिया ने जो विस्तार लिया है, उससे चिंता में है मिठाइयों का बाजार क्योंकि मिठाइयों की कुल मांग में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की हिस्सेदारी लगभग 50 फ़ीसदी के करीब जाती नजर आ रही है। इसके बाद नया बदलाव यह कि छत्तीसगढ़ी व्यंजनों में से कुछ व्यंजन अब प्रतिष्ठित मिठाई दुकानों में भी बनाएं और बेचे जाने लगे हैं।

अईरसा सबसे आगे
बारहमासी मांग में आ चुका है अईरसा। स्वाद इतना पसंद आ रहा है कि 280 रुपए किलो जैसी कीमत स्वीकार कर ले रहे हैं उपभोक्ता। नई बात यह कि लगभग हर वर्ग, हर समाज से उपभोक्ता मांग निकली हुई है। होली करीब है इसलिए मांग दोगुनी पार करके आगे जाने के लिए तैयार है। तैयार हैं निर्माण और विक्रेता संस्थान देवांगन खजूर वाला के संचालक हेमंत देवांगन।

शॉर्टेज की स्थिति में गुझिया
400 रुपए किलो। गुझिया में बोली जा रही यह कीमत सहर्ष स्वीकार कर रहे हैं उपभोक्ता। ऐसे में होली की मांग पूरी करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है संस्थान को। इसके बावजूद मांग बढ़त लिए हुए हैं। सहयोग उस मीठी सलोनी का मिल रहा है, जो 200 रुपए किलो जैसी क्रय शक्ति वाली कीमत के भीतर मिल जा रही है।चिंता में मिठाई दुकानें

चिंता में मिठाई दुकानें
होली, रक्षाबंधन और दीपावली जैसे पर्व पर गुलजार रहने वाली मिठाई दुकानें इस बार चिंता में हैं क्योंकि पूछ-परख से बेहतर मांग की संभावना को झटका लगता नजर आ रहा है। इसलिए यह क्षेत्र भी पर्व को देखते हुए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के निर्माण की राह पर चलता नजर आ रहा है क्योंकि चुनिंदा संस्थानों में गुझिया नजर आने लगी हैं।
