सच क्या है, साजिश किसकी है ? का पता करने बढ़ाना होगा जांच का दायरा

‘गब्बर’ की जांच करेगा ‘सांभा’ ….. साहब ये ठीक नहीं ….

बिलासपुर। रतनपुर थाना में ही हुई घटना पर तीन दिन बाद प्रार्थी लौट कर उसी थाने लिखित शिकायत करता है। इस पर थाने में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ अश्लील गाली-गलौच और मारपीट करने का अपराध भी दर्ज कर लिया जाता। आरोपी एएसआई निलंबित और पड़ोस के थाने के प्रभारी निरीक्षक को मामले की विवेचना का जिम्मा भी सौंपा दिया गया है। पूरी कार्रवाई करंट की गति से। वहीं सीसीटीएनएस के वीव एफआईआर पोर्टल पर पंजीबद्ध अपराध कमांक 288/2026 पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 351 (2) का मामला
‘केश सेंसेटिव’ क्यों हो गया है। इन्हीं धाराओं में दर्ज और भी मामले तो पारदर्शी है। पोर्टल पर जाकर कोई भी देख सकता है। कुछ तो गड़बड़ है दया ? 12 मार्च के ही थाने की सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सार्वजनिक होगी तो क्या और भी आएंगे जद में…? सच क्या है, साजिश किसकी है ? का पता करने जांच का दायरा बढ़ाकर सच सामने लाने सीनियर आईपीएस अफसर को सौंपना होगा जांच का जिम्मा ।

क्या है मामला

घटना के तीन दिन बाद बनियापारा रतनपुर निवासी 50 वर्षीय विनोद जायसवाल पिता गनपत जायसवाल ने  थाना प्रभारी रतनपुर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की। इसमें बताया कि दिनांक 12.04 2026 को करीबन 2:00 से 03:00 बजे के बीच में थाना रतनपुर मे आकर ए.एस.आई. दिनेश तिवारी को बोला मैं परिवाद लगाया था। उस जानकारी को आप क्यो कोर्ट में नहीं भेज रहे हो मैं आपके पास कई बार आ चूका हूँ। परिवाद के लिए मैं आपको पैसा भी दे चुका हूँ। फिर भी मेरा काम नहीं कर रहे हो। इस बात से नाराज होकर तिवारी साहब मेरे को माँ बहन की गाली देकर हाथ झापड से मारपीट किया है। मुझे करीबन 15 से 20 थप्पड सभी पुलिस स्टाफ के सामने मारा और मुझे धमकी देते हुए बोल रहा था। कि तू कितना बड़ा नेता है। तेरा सब नेता गिरी निकाल दुंगा। तुमको जेल भेजवा दूंगा। मारपीट करने से अभी तक मेरे सिर में दर्द हो रहा है। कान से सुनाई ठीक से नहीं दे रहा है।

करंट गति से अपराध दर्ज

लिखित शिकायत मिलने के बाद रतनपुर थाने में ही पदस्थ सहायक उप निरीक्षक दिनेश तिवारी के विरूद्ध अपराध कमांक 288/2026 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 351 (2) के तहत यानी अश्लील गाली-गलौच, मारपीट और आपराधिक धमकी देने का अपराध दर्ज कर लिया गया है।  इस मामले की विवेचना के लिए कोटा थाना के प्रभारी निरीक्षक नरेश चौहान को विवेचना अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।

आरोपी एएसआई निलंबित

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर ने प्रार्थी विनोद कुमार जायसवाल के लगाएं आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सउनि दिनेश तिवारी को निलंबित कर। गंदी-गंदी गाली-गलौच कर हाथ मुक्का से मारपीट करने को अवैधानिक कृत्य, और अशोभनीय आचरण मानकर निलंबित एएसआई को रक्षित केन्द्र, बिलासपुर सम्बद्ध कर दिया है।

कार्रवाई पर सवाल क्यों

आरोपी सहायक उप निरीक्षक दिनेश तिवारी के विरूद्ध  भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 351 (2) के तहत यानी अश्लील गाली-गलौच, मारपीट और आपराधिक धमकी देने का अपराध दर्ज कर किया गया है। चोंट गंभीर और जानलेवा हो तो इन धाराओं के तहत दर्ज मामले संज्ञेय हो जाते हैं। यानी आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी। जैसा कि प्रार्थी विनोद जायसवाल ने ही अपनी लिखित शिकायत में उल्लेख किया है कि हाथ झापड से मारपीट किया है। मुझे करीबन 15 से 20 थप्पड़ सभी पुलिस स्टाफ के सामने मारा। … मारपीट करने से अभी तक मेरे सिर में दर्द हो रहा है। कान से सुनाई ठीक से नहीं दे रहा है। प्रार्थी इन तीन दिनों क्या उपचार के लिए किसी अस्पताल में भर्ती थे ? फिर इलाज करवाकर तीन दिन बाद उसी थाने में बेखौफ अपराध दर्ज कराने पहुंचे। थाने के अंदर ही हुई घटना के तीन दिन बाद लिखित शिकायत मिलने तुरंत अपराध दर्ज कर लेने का मतलब यही होना चाहिए कि मारपीट जानलेवा है और प्रार्थी को गंभीर चोंटे आई होगी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है मारपीट में गंभीर चोंटे आने पर थाने में मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने प्रार्थी को इलाज के लिए अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया। तीन दिन तक अन्य पुलिस कर्मी और और अधिकारी घटना को लेकर खामोश क्यों रहे। ये तो मानवीय संवेदना को लेकर भी सवाल खड़े करता है। स्वत: संज्ञान लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन दिनों रतनपुर थाने का प्रभार प्रशिक्षु आईपीएस के पास है। क्या उनको भी तीन दिन तक घटना की भनक नहीं लगने दी गई। ऐसा है तो ये मामला तो और भी कई सवाल खड़े करता है।

12 अप्रैल के सीसीटीवी कैमरे के फ़ुटेज में क्या है खास

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अभी हाल ही में इसके दायरे को बढ़ावा भी गया है। काफी अरसे तक सीसीटीवी कैमरे के फ़ुटेज को संरक्षित रखने के निर्देश भी है। रतनपुर थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे के 12 से 15 अप्रैल तक रिकार्ड फ़ुटेज के अवलोकन से और भी कई रोचक खुलासे होने की संभावनाएं बताई गई है। सच के खुलासे की मंशा पुलिस प्रशासन की है जो पब्लिक डोमेन में तीन दिनों के सीसीटीवी फुटेज के रिकार्ड सार्वजनिक होने चाहिए। इससे ही वर्दी के दामन पर लगे छींटों को साफ करने में मदद मिलेगी।

सीनियर आईपीएस से हो मामले की जांच

जैसा कि विदित है कि रतनपुर थाने का प्रभार इन दिनों प्रशिक्षु आईपीएस अफसर के पास है। कथित रुप से मारपीट की घटना थाने के अंदर हुई है। प्रार्थी ने कई अन्य पुलिस कर्मियों के समझ घटना होने का उल्लेख अपने लिखित आवेदन पर किया है। जिस पर भरोसा कर एफआईआर दर्ज करने और निलंबन की कार्रवाई हुई है। ऐसे में घटना को लेकर थाना प्रभारी की भी जिम्मेदारी भी तो तय होगी। जांच से उन्हें अलग कैसे किया जा सकता है। पुलिस अधीक्षक ने कोटा थाने के प्रभारी निरीक्षक को विवेचना की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में भारतीय पुलिस सेवा के अफसर से उसके अधिनस्थ कर्मी की पूछताछ और विवेचना कानून सम्मत होगी ? या फिर पहले से ही थाना प्रभारी को क्लीन चिट देकर थाना के अंदर हुई घटना की विवेचना पूरी कर ली जाएगी। वर्दी के दामन पर लगे दाग हटाने है तो जांच का दायरा बढ़ा कर सीनियर आईपीएस अफसर से मामले की विवेचना कराई जानी चाहिए। जिससे की जांच और पूछताछ कानून सम्मत हो।