विदेशी मांग ने बढ़ाएं दाम
बिलासपुर। दबाव पंजाब का। अग्रिम सौदा चालू कर दिया है निर्यातकों ने। ऐसे में दोगुनी महंगी हो चुकी है इमली। तेजी का यह दौर आगे भी बने रहने के आशंका है क्योंकि अब अरब देशों की भी मांग ने छत्तीसगढ़ में दस्तक दे दी है।
खुश हैं प्रदेश के इमली संग्राहक। हैरत में हैं वनोपज बाजार इमली में आ रही तेजी को देखकर। यह तेजी इस बार दीर्घ अवधि तक बने रहने की संभावना है क्योंकि पहली बार इसमें निर्यातक दोगुनी मात्रा में सौदे कर रहें हैं। इधर घरेलू बाजार भी संभावित शॉर्टेज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए खरीदी की मात्रा बढ़ा रहा है।

पहली बार दोगुनी
बीते सत्र में 20 से 22 रुपए किलो पर बिकने वाली इमली इस बार 50 से 55 रुपए किलो जैसी नई ऊंचाई पर पहुंची हुई है। बीज सहित इमली में इस तेजी के बाद बीज रहित इमली रिकॉर्ड 95 से 98 रुपए किलो जैसी उच्च कीमत पर खरीदी जा रही है। प्रति किलो कीमत शतक से आगे जाने के आशंका इसलिए है क्योंकि निर्यातकों ने भी खरीदी की मात्रा बढ़ाई हुई है।

प्रतीक्षा अच्छे दिन की
शांत है महुआ 45 से 48 रुपए किलो पर। निर्यात बंद है चरोटा में इसलिए 20 से 25 रुपए किलो जैसी निचली कीमत पर बेहतर मांग की प्रतीक्षा कर रहा है। सबसे ज्यादा खराब हालत उस बबूल बीज की है, जिसमें 16 से 17 रुपए किलो जैसी निम्न कीमत के बावजूद मांग नहीं है। इसीलिए चरोटा और बबूल बीज के संग्रहण को लेकर अब संग्राहकों में रुचि घटती हुई देखी जा रही है।

गर्मी इसलिए भी
वनों का घटता क्षेत्र और सिमटते मैदान से वन उपज का उत्पादन साल-दर-साल कम होता जा रहा है जबकि मांग का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में बहुपयोगी वनोपज की कीमत बढ़ रही है। ताजा स्थितियों में इमली, बबूल बीज और चरोटा इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
दबाव खरीदी का
पंजाब की खरीदी इस बार दोगुनी के करीब पहुंचने की संभावना है। दुबई के लिए निर्यात सौदे भी ज्यादा हो रहे हैं। इसलिए इमली में इस बार दोगुनी कीमत बोली जा रही है।
-सुभाष अग्रवाल, एस पी इंडस्ट्रीज, रायपुर
