लड्डू और पापड़ी बनाने वाली लघु ईकाइयों में मांग
बिलासपुर। तेवर शीत ऋतु के। उबाल गोंद में। मांग ने जो गति बनाई हुई है उसके बाद बबूल गोंद में किलो पीछे 40 रुपए की तेजी आ चुकी है।
गोंद में मांग दोगुनी के करीब पहुंचने को है। यह तब, जब कीमत में न केवल तेजी आ चुकी है बल्कि धारणा आगे भी तेजी की जताई जा रही है। यह इसलिए क्योंकि शीत ऋतु के तेवर तीखे बने हुए हैं। इसलिए गोंद में अग्रिम सौदे का क्रम अभी भी जारी है।
खूब बन रहे लड्डू
शीतकाल के दिनों में हमेशा से मांग में रहता आया है गोंद लेकिन इस बार यह दोगुनी से आगे जा चुकी है। ऐसी ही स्थिति लड्डू- पापड़ी बनाने वाली लघु ईकाइयों में भी बनी हुई है, जहां इन सामग्रियों की खरीदी उत्साह बढ़ाने वाली मानी जा रही है। इसके अलावा साप्ताहिक हाट-बाजारों में भी मांग बढ़ते क्रम पर है।

निकली खरीदी इनकी भी
पैकिंग में गोंद और गोंद के लड्डू भी आने लगे हैं। फलस्वरूप गोंद का कारोबार दिन-प्रतिदिन विस्तार ले रहा है। क्वालिटी गोंद की खरीदी में सबसे आगे रहने वाली इन ईकाइयों के बीच प्रतिस्पर्धा ने भी कीमत को और आगे बढ़ाया हुआ है। साथ, पैक्ड लड्डू बनाने वाली ईकाइयों का भी मिल रहा है। इसलिए भी गोंद की कीमत हर दो से तीन दिन में बढ़ जा रही है।
मांग में बबूल सबसे आगे
किलो पीछे 40 रुपए की उछाल के बाद बबूल गोंद 300 से 700 रुपए किलो पर जा पहुंचा है। फिर भी बढ़त की आशंका बरकरार है क्योंकि मांग में सबसे आगे है। साथ मिल रहा है उस कुल्लू गोंद का जिसकी कीमत 600 से 1400 रुपए किलो बोली जा रही है। जबकि कीमत के मामले में धावड़ा गोंद 800 से 2000 रुपए किलो जैसे उच्च भाव के साथ सबसे आगे है।
