जांच के नाम पर महज खाना पूर्ति
बलौदाबाजार। मौसम साफ होने के आसार के बीच यूरिया की डिमांड भी निकल रही है । इसी के अनुपात में कीमत भी बढ़त ले रही है। हाल कुछ ऐसा है कि आने वाला हर दिन, नई शर्त के साथ किसानों के पास पहुंच रहा है। रविवार को बाजार का भाव था, चार सौ से पांच सौ रुपए प्रति बोरी।
रबी सत्र मे भी यूरिया के लिए किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। सिस्टम की चुप्पी से उर्वरक बाजार अपनी शर्त और अपनी कीमत पर यूरिया की बिक्री कर रहा है। कीमत को लेकर हर क्षेत्र में बिक रही यूरिया की खरीदी के लिए जैसी परेशानी किसान उठा रहे हैं, उससे निराशा तो है ही, गुस्सा भी देखने में आ रहा है।यह गुस्सा कभी भी गंभीर रुप मे दिखाई दे सकता है।
इस कीमत पर
विभाग भले ही कार्यवाही करने की बात कर रहा है लेकिन कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति वाले अंदाज की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों मे यूरिया चार सौ से पांच सौ रुपए बोरी में मिल रही है। ज्यादा मांग वाले क्षेत्र मे अन्य सामाग्री दी जा रही है। जबकि ऐसा किया जाना नियम के विरूद्ध है। बता दें कि यूरिया की निर्धारित दर 266 रुपए 50 पैसे प्रति बोरी है।
प्रश्न, जिसके उत्तर नहीं
रबी की मांग और खरीफ की तैयारियों के बीच कंपनियों ने यूरिया की जो सप्लाई की है, उसका अस्सी प्रतिशत हिस्सा मार्कफेड को दिया गया है । शेष बीस फीसदी, खुले बाजार के लिए जारी हुआ है जबकि मांग इस बीस फीसदी से कहीं ज्यादा है। इस गलत अनुपात मे वितरण के लिए जिम्मेदार कौन है ? इस सवाल के जवाब में चुप्पी साध ली गई है।
अब बना रहे योजना
खुले बाजार और मार्कफेड के लिए वितरण का अनुपात देखने के बाद , मांग और बिक्री को लेकर जैसी स्थिति बन रही है उसके बाद अब सहकारी समितियों के माध्यम से विक्रय की योजना बनाई जा रही है लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा, समितियों की अनुमति का नहीं मिलना बन रही है। इसलिए दूसरे विकल्प की तलाश की जा रही है।
यूरिया की किल्लत पर पूरी नजर है । समस्या के हल के लिए सहकारी समितियों की मदद से इसकी उपलब्धता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ।
एस. आर. पैकरा, उपसंचालक, कृषि, बलौदाबाजार

