बिलासपुर। जितनी जरूरत उतनी ही खरीदी। एक लाईन की इस सोच के बाद किराना बाजार में 70 फीसदी मासिक उपभोक्ता मांग टूट चुकी है।शेष 30 फीसदी ही ऐसे उपभोक्ता हैं जिनकी मासिक खरीदी और मांग की मात्रा का स्तर बीते महीने जैसा ही है।

दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमत पहले भी बढ़ती रही है लेकिन इस बार कीमतों में इजाफा के साथ वजन और संख्या कम करने जैसी व्यापारिक गतिविधियों ने उपभोक्ताओं को हताश कर दिया। बचाव के बेहद सीमित उपायों के बीच अब ‘ जितनी जरूरत, उतनी ही खरीदी’। जैसे उपाय अमल में लाने लगे हैं उपभोक्ता।

मासिक खरीदी में 70 फीसदी की टूट

नई व्यापारिक गतिविधियां जबर्दस्त नुकसान पहुंचाने वाली मानी जा रहीं हैं। इसलिए महिने के अंत में किराना सामानों की सूची लेकर बाजार पहुंचने वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 70 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।शेष 30 प्रतिशत ‌ही ऐसे उपभोक्ता रह गए हैं, जिनकी मांग और मात्रा एक समान बनी हुई है लेकिन खरीदी और मात्रा के कम होने के संकेत अब यह भी दे रहें हैं।

जब जरूरत,तब खरीदी

यह‌ नया बदलाव भी किराना बाजार पहली बार देख रहा है कि उपभोक्ता खरीदी अब जरुरत के वक्त पर हो रही है। इसमें भी मात्रा का खयाल उपभोक्ता गंभीरता से रख रहे है। इसलिए मासिक खरीदी की व्यवस्था टूटने की कगार पर नजर आ रही है।यह नया बदलाव भंडारण जैसी व्यवस्था पर असर डालने वाला मान रहा है किराना बाजार।

मांग आधी

चांवल,दाल, गेंहू, आटा और खाद्य तेल। रोजमर्रा की जरुरतें पूरी करने वाली इन सभी खाद्य सामग्रियों की खरीदी 50 फीसदी रह गई है। टूट की ओर है इनकी कीमत, इसके बावजूद उपभोक्ता खरीदी स्थिर है, इन सभी सामग्रियों में। टूथपेस्ट, साबुन, वाशिंग पावडर और काॅस्मेटिक्स प्राॅडक्ट की खरीदी में भी स्थिरता देखी जा रही है। चिंता बढ़ाने वाली हैं यह व्यापारिक गतिविधियां। फिर भी बेहतर की प्रतीक्षा है।