बिलासपुर। मछुआरे और मछुआ सहकारी समितियां कृपया ध्यान दें। मछली जाल की खरीदी पर अब प्रति किलो 50 से 60 रुपए ज्यादा खर्च करने होंगे क्योंकि जाल निर्माता ईकाइयां भी प्लास्टिक के दाने की शार्ट सप्लाई के घेरे में आ चुकीं हैं।

प्लास्टिक की पन्नियां और प्लास्टिक के पैकेजिंग प्राॅडक्ट में आई गर्मी की आंच अब मछली जाल तक पहुंच गई है। जून के अंतिम सप्ताह से शुरू होने वाले मछली जाल के सीजन की तैयारी कर रहे होलसेल मार्केट में इस बार खरीदी को लेकर उत्साह कम है क्योंकि कीमतें बेहतर नहीं मानी जा रहीं हैं।

अब इस दर‌ पर

था 550 से 650 रुपए किलो। है 600 से 700 रुपए किलो। प्लास्टिक के मछली जाल में यह तेजी होलसेल काउंटरों को इसलिए परेशान कर रही है क्योंकि पूर्व की दरों पर ही बीते बरस कमजोर थी खरीदी। ऐसे में नई कीमत में खरीदी को प्रतिसाद मिलना कठिन है। रही-सही कसर मानसून का पूर्वानुमान पूरी कर रहा है जिसमें कमजोर बारिश की संभावना भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने व्यक्त की है।

महंगा हुआ नायलॉन जाल भी

नायलॉन जाल की भी खरीदी करते हैं मछुआरे और मछुआ सहकारी समितियां। ताजा स्थितियों में नायलॉन के मछली जाल भी महंगे हो चुके हैं। 400 से 450 रुपए किलो पर स्थिर नायलॉन का मछली जाल भी 500 से 600 रुपए किलो पर आ चुका है। ऐसे में इसकी खरीदी भी कमजोर रहने की संभावना है। यही वजह है कि होलसेल काउंटर इसके भंडारण को लेकर अनिच्छुक हैं।

स्टॉक मनोवृत्ति नहीं

प्लास्टिक के दाने में आयात बंद होने के बाद प्लास्टिक प्रोडक्ट मार्केट अब भंडारण करने की मनोवृत्ति छोड़ रहा है। विशेष तौर पर मछली जाल में तो सतर्कता इतनी ज्यादा है कि महज एक या दो दिन का भंडारण किया जा रहा है क्योंकि खरीदी और मांग के दिन बेहद सीमित होते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र भी अब प्रतिस्पर्धी हो चला है इसलिए भी स्टॉक नहीं रखा जा रहा है।