प्रमुख सचिव कृषि छत्तीसगढ़ शासन को कृषक अभिकर्ता कल्याण संघ ने भेजा पत्र
भाटापारा। दुबराज, विष्णुभोग और जीराफूल सहित धान की शेष 32 सुगंधित प्रजातियों को भी कृषक उन्नति योजना में शामिल किए जाने का प्रस्ताव कृषक अभिकर्ता कल्याण संघ ने रखा है।
प्रमुख सचिव कृषि को लिखे अपने पत्र में संघ के अध्यक्ष राजेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि श्रेष्ठ गुणवत्ता के बावजूद यह प्रजातियां विलुप्ति की राह पर इसलिए हैं क्योंकि वर्तमान योजना सामान्य एवं संकर प्रजाति को ज्यादा बढ़ावा दे रही है।
चाहिए प्रीमियम मूल्य वाली फसल की मान्यता
कृषि सचिव को भेजे प्रस्ताव में संघ ने स्पष्ट किया है कि परंपरागत सुगंधित, धान को सामान्य धान नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इनमें कई ऐसी विशेषताएं हैं, जिनकी वजह से इन प्रजातियों के चावल की मांग विदेशों में बढ़ रही है। उच्च पोषण गुणवत्ता एवं विशिष्ट सुगंध वाली यह प्रजातियां कम उर्वरक मांगती हैं, कीटनाशक की जरूरत कम पड़ती है। सबसे बड़ा गुण यह है कि सूखा और जल भराव जैसी प्रतिकूल जलवायु में भी बेहतर परिणाम देतीं हैं।

वैश्विक मांग में इजाफा
यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका, मध्य पूर्व एवं पूर्वी एशियाई बाजार में सुगंधित कम इनपुट एवं क्वालिटी राइस की डिमांड जैसी बढ़ रही है, उससे छत्तीसगढ़ से उच्च मूल्य निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। पारंपरिक बासमती उत्पादक क्षेत्र से अलग छत्तीसगढ़ को अलग से प्रीमियम एवं विरासत चावल के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी। सबसे अहम यह कि विलुप्त हो रही यह प्रजातियां बचाई जा सकेंगी।
इसलिए पृथक प्रोत्साहन श्रेणी
कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत सरकारी धान की खरीदी व्यवस्था भले ही देश स्तर पर छत्तीसगढ़ को अलग पहचान दे रही हो लेकिन अनजाने में यह व्यवस्था अधिक उत्पादन देने वाली संकर और सामान्य किस्म की बोनी को बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी ओर श्रेष्ठ गुणवत्ता, प्रीमियम बाजार मूल्य, अधिक पोषण एवं पारिस्थितिकी महत्व रखने वाली परंपरागत सुगंधित किस्में न केवल पिछड़ रहीं हैं बल्कि विलुप्ति की राह पर है। जबकि यह प्रजातियां राज्य की जलवायु के अनुकूल हैं। इसलिए इनके लिए अलग से प्रोत्साहन श्रेणी की मांग अब जोर पकड़ती नजर आ रही है।

वैश्विक बाजार में बढ़ रही मांग
वर्तमान में चल रही कृषक उन्नति योजना में दुबराज, विष्णुभोग और जीरा फूल जैसी धान की अन्य सुगंधित प्रजातियां शामिल करने की मांग इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि यह प्रजातियां प्रदेश की जलवायु के अनुकूल हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि विदेशों में क्वालिटी राइस के रूप में सुगंधित चावल की मांग बढ़ रही है। योजना में शामिल करने से न केवल सुगंधित धान की बोनी को बढ़ावा मिलेगा बल्कि विलुप्त हो रहीं यह प्रजातियां बचाई जा सकेंगी।
- राजेश तिवारी, अध्यक्ष, कृषक अभिकर्ता कल्याण संघ, भाटापारा
