बलौदाबाजार। दूध की दुहाई 100 से 150 रुपए। सिर्फ एक टाईम। चराई 150 से 200 रुपए। सिर्फ एक दिवस। ग्वालों और चरवाहों की यह मजदूरी दर अब डेयरियां खामोशी के साथ स्वीकार कर रहीं हैं क्योंकि ग्वालों और चरवाहों की नई पीढ़ी इस काम से किनारा कर रहीं हैं।
जिले की डेयरियां और गौ- पालक प्रशिक्षित ग्वालों की खोज में हैं, तो अनुभवी चरवाहों की भी खोज- खबर ली जा रही है। लेकिन दोनों की घटती संख्या से डेयरी का नियमित संचालन बाधित होने लगा है। इसलिए उपलब्ध ग्वाले और चरवाहों की मजदूरी दर स्वीकार कर ली जा रही है। साथ ही विकल्प भी खोजे जा रहें हैं, जो बेहद सीमित हैं।
दुहाई सौ से डेढ़ सौ रुपए लेकिन…
ग्वाले प्रति 10 गौ वंश समूह की दुहाई दर 100 से 150 रुपए ले रहे हैं लेकिन एक समय की यह दर ज्यादा मान रहीं हैं डेयरियां। विकल्प है मशीनों के जरिए दूध की दुहाई का, पर कीमत ज्यादा है मशीनों की। इसलिए ग्वालों की यह पारिश्रमिक दर मान रहीं हैं डेयरियां क्योंकि प्रशिक्षित ग्वालों की संख्या कम हो रही है।

चराई की दरें भी बढ़ीं
ग्वालों की तुलना में चरवाहों की संख्या फिलहाल ठीक ही है लेकिन बढ़ता आबादी क्षेत्र चारागाह को अपनी चपेट में ले रहा है। इसलिए गौ वंशों को चारा के लिए दूर तक ले जाना पड़ रहा है। इसलिए चरवाहों ने चराई की दर 150 से 200 रुपए प्रति दिवस तय कर ली है। बढ़त के संकेत इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि सूखने लगे हैं हरा चारा के मैदान।
तेज है इस काम की भी दर
अनिवार्य है नियमित साफ- सफाई। इस काम के पूरा करने के बाद दाना- पानी की व्यवस्था भी बनाए रखनी है। लगभग पूरा दिन लगने वाले इस काम की एवज में 300 से 350 रुपए प्रति मजदूर भुगतान करना पड़ रहा है। हाथों से ही यह काम किया जाना है इसलिए बढ़ी हुई यह मजदूरी स्वीकारी जा रही है।
