बिलासपुर। कम हो रहा है उत्साह। घट रही है रंग- गुलाल में उपभोक्ता मांग। इसलिए होली बाजार भी औपचारिक तैयारी कर रहा है। कीमत की बात करें तो स्थिर है रंग गुलाल की प्रति किलो दर।

रंगोत्सव में इस बार मांग कम रहने की धारणा है। ऐसा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि परीक्षाएं चालू हो चुकीं हैं। इसके अलावा सेहत को लेकर जागरूक हुए हैं उपभोक्ता। खासकर त्वचागत समस्याओं को लेकर यह जागरूकता कुछ ज्यादा ही है। प्रारंभिक रुझान को देखते हुए होलसेल और रिटेल मार्केट ने केवल परंपरा निभाने लायक भंडारण किया हुआ है। अब प्रतीक्षा है मांग की।

सात नहीं, सिर्फ तीन

कोरोना महामारी के बाद होली और रंगोत्सव का पर्व केवल तीन दिवस का रह गया है। थोक में एक साथ चार दिवस की कटौती के बाद बाजार ने भी रणनीति बदली और भंडारण उतना ही किया, जितने में मांग पूरी की जा सके। यह बदलाव अब न केवल मजबूत हो चला है बल्कि एक दिवस की कटौती और होने की आशंका बलवती हो रही है।

केमिकल कलर से दूरी

बाजार सूत्रों के मुताबिक इस बार होली के लिए होलसेल मार्केट ने केमिकल कलर की खरीदी और भंडारण से दूरी बना ली है। बीते साल के बचे कलर को निकालने की कोशिश की जाएगी। अलबत्ता हर्बल कलर और हर्बल गुलाल की संभावित मांग को देखते हुए तैयारी में है रंग- गुलाल का बाजार। इसमें पूछ-परख से रुझान बेहतर मांग के बन रहे हैं।

स्थिर है प्रति किलो भाव

बाजार सूत्रों के मुताबिक गुलाल एक नंबर में भाव 90 से 140 रुपए किलो बोला जा रहा है, तो दो नंबर का गुलाल 60 से 100 रुपए किलो पर शांत है। हर्बल गुलाल की प्रति किलो कीमत 160 से 300 रुपए पर पहुंची हुई है। शक्कर की माला 140 से 150 रुपए किलो पर स्थिर है। इसके बावजूद अपेक्षित मांग नहीं है जबकि बताशा में छिटपुट मांग निकलने लगी है।